नोटबंदी के बाद फर्जीवाड़े में तीन बैंक अधिकारियों को चार-चार साल कैद
नई दिल्ली। नोटबंदी के बाद पुराने नोट बदलने के मामले में अदालत ने पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के तीन अधिकारियों को चार-चार साल कैद व जुर्माने की सजा सुनाई है। इनके खिलाफ सीबीआई ने अमानत में खयानत व खातों से छेड़छाड़ व अन्य संबंधी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। मोदी सरकार ने आठ नवंबर 2016 को एक हजार व पांच सौ रुपए मूल्य के पुराने नोट बंद कर दिए थे।
राउज एवेन्यू अदालत के विशेष सीबीआई जज राजकुमार चौहान ने पीएनबी के तीन वरिष्ठ अधिकारियों रामा नंद गुप्ता, भूवनेश कुमार जुल्का व जीतेंद्र वीर अरोड़ा को चार-चार साल कैद व चार-चार लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने इन्हें 10.51 लाख रुपए बैंक में जमा करने संबंधी प्रविष्टि में धांधली का दोषी मानते हुए सजा सुनाई है। इन नोटों के बदले अनधिकृत तरीके से नए नोट जारी कर दिए गए थे। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि दोषियों को बैंक अधिकारी होने के नाते ईमानदारी व नैतिकता के ऊंचे मानक तय करने चाहिए थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उनके कृत्य ने उसी संस्थान पर कलंक लगा दिया जहां वह तरक्की करके बड़े अधिकारी बने थे। नोटबंदी के बाद बैंक अधिकारियों द्वारा अपने पद के दुरुपयोग का यह क्लासिकल उदाहरण है। अदालत ने तीनों अधिकारियों को आपराधिक साजिश के साथ विश्वासघात, फर्जी दस्तावेज प्रयोग करने, बैंक खातों में छेड़छाड़ व भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम की धाराओं में दोषी ठहराने के बाद सजा सुनाई है। अभियोजन के मुताबिक इन दोषियों के खिलाफ पीएनबी की एक शाखा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पांच अप्रैल 2015 को शिकायत दी थी।