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बीच बहस में : पत्नी को पति पर मुकदमा चलाने के अधिकार से वंचित करने का पर्याप्त कारण नही

Wed, 19 Jan 2022 05:47 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

न्यायमूर्ति राजीव शकधर व न्यायमूर्ति सी हरि शंकर की पीठ के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा अदालत के समक्ष पेश तथ्यों को देखते हुए यह सोचने का कोई न्यायोचित आधार है कि दोनों पक्षों के बीच विवाह की स्थिति में पत्नी को दुष्कर्म के कृत्य के लिए अपने पति पर मुकदमा चलाने की क्षमता से वंचित करने के लिए पर्याप्त है।
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demo pic - फोटो : ANI
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विस्तार
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दो पक्षों के बीच विवाह की स्थिति में एक पत्नी को अपने पति पर वैवाहिक दुष्कर्म के लिए मुकदमा चलाने से वंचित नहीं किया जा सकता और न ही ऐसा करने का पर्याप्त आधार है। मामले में अदालत की सहायता के लिए नियुक्त वरिष्ठ अधिवक्ता राजशेखर राव ने अदालत के समक्ष यह तर्क रखा।

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न्यायमूर्ति राजीव शकधर व न्यायमूर्ति सी हरि शंकर की पीठ के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा अदालत के समक्ष पेश तथ्यों को देखते हुए यह सोचने का कोई न्यायोचित आधार है कि दोनों पक्षों के बीच विवाह की स्थिति में पत्नी को दुष्कर्म के कृत्य के लिए अपने पति पर मुकदमा चलाने की क्षमता से वंचित करने के लिए पर्याप्त है।

राव ने भारतीय दंड संहिता की धारा 375 में प्रदान किए गए अपवाद को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि शायद अब समय आ गया है कि आपकी प्रभुसत्ता इस प्रावधान को दफन कर दे। यह उचित नहीं है कि संसद ने इसे अधिनियमित किया है और संसद शायद भविष्य में ध्यान रखेगी। संसद के पास अवसर था और संविधान लागू होने के बाद इसे करने की क्षमता और अनुच्छेद 13 (1) के तहत जनादेश चलन में आया। कई विधि आयोगों की रिपोर्ट के बाद उसे यह अवसर मिला लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
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याचिकाओं ने वैवाहिक बलात्कार के अपराधीकरण की मांग की, जो वर्तमान में उक्त अपवाद के रूप में अपराध नहीं है। राव ने इंडिपेंडेंट थॉट में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा शीर्ष अदालत ने धारा 375 के पहले के अपवाद में स्पष्ट किया है कि 18 साल से कम उम्र की लड़की के साथ यौन संबंध दुष्कर्म है भले ही वह शादीशुदा हो या नहीं।

उन्होंने कहा इसमें कोई संदेह नहीं हो सकता कि अदालतें इसे अपराध की श्रेणी में नहीं बना सकतीं। हालांकि, इसमें कोई संदेह नहीं हो सकता है कि धारा 375 आईपीसी को आंशिक रूप से हटाकर कोई नया कानून नहीं बनाया जा रहा। 

उन्होंने अपने तर्क को उचित ठहराने के लिए दूरदर्शन की एक टैग लाइन का हवाला दिया जिसका इस्तेमाल लोगों को दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनने का आग्रह करने के लिए किया जाता है। उन्होंने कहा मूल पंक्ति में लिखा था ॐमरजी है आपकी, सर है आपकाॐ। राव ने कहा कि दुष्कर्म के लिए अपने पति पर मुकदमा चलाने में एक महिला की अक्षमता के संदर्भ में, टैगलाइन होनी चाहिए ॐमरजी है आपकी, आरख़र वर है आपकाॐ।

पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा को भी अपनी दलीलों के साथ तैयार रहने को कहा। न्यायमूर्ति शकधर ने कहा कि कोर्ट इस मामले को ज्यादा दिन तक लटकने नहीं दे सकता क्योंकि जितनी देर लटकेगी, उतनी ही अटकलबाजी लगेगी।

अटकलों के विषय पर न्यायमूर्ति शंकर ने टिप्पणी की कि उन्होंने एक पत्रिका में पढ़ा था कि इस मामले में तर्क सुनने वाले दो न्यायाधीश एक दूसरे के साथ भिन्न होने जा रहे हैं और यह मामला तीसरे न्यायाधीश को भेजा जाएगा।

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