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Delhi News: रेडिएशन को लक्षित कर कम किया जा रहा विकिरण का दुष्प्रभाव

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- अस्थि कैंसर जागरूकता माह -
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- सफदरजंग अस्पताल में हर माह आते हैं अस्थि कैंसर के करीब 30 नए मरीज, समय के साथ तकनीक में आ रहा सुधार
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। रेडियोथेरेपी को लक्षित कर विकिरण से होने वाले का दुष्प्रभाव को कम किया जा रहा है। इससे न केवल मरीजों की समस्याएं कम हुईं, बल्कि दूसरे रोग होने की आशंका भी घट गई। विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले 10 सालों से देश में कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। इनके इलाज में रेडियोथेरेपी की अहम भूमिका रहती है। ऐसे में इनके कारण मरीज में दुष्प्रभाव भी होते हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए पिछले कुछ सालों में तकनीक में काफी सुधार किया गया है। इसके मदद से रेडिएशन को कैंसर सेल पर सीधे दिया जाता है जिससे दुष्प्रभाव होने की आशंका काफी कम हुई है।
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सफदरजंग अस्पताल में मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ कौशल कालरा का कहना है कि रेडियोथेरेपी देने की तकनीक पर लगातार सुधार चल रहा है। अस्पताल में हर माह अस्थि कैंसर के 20 से 30 नए मरीज पंजीकृत होते हैं। इन मरीजों को इलाज के साथ रेडियोथेरेपी दी जाती हैं। इसमें कोशिश की जाती हैं कि रेडिशन का दुष्प्रभाव बहुत कम हो। डॉक्टरों का कहना है कि बोन कैंसर के इलाज में रेडिएशन थेरेपी का इस्तेमाल कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने या ट्यूमर को सिकोड़ने के लिए किया जाता है। यह सर्जरी से पहले या बाद में या फिर सर्जरी के विकल्प के रूप में इस्तेमाल हो सकता है। कुछ मामलों में, रेडिएशन थेरेपी का इस्तेमाल दर्द को कम करने के लिए भी किया जाता है।
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इन व्यक्तियों में हो सकता है बोन कैंसर

- बचपन में रेडियोथेरेपी मिली हो
- आनुवंशिकी कारण
- बचपन से आंखों का कैंसर रहा हो
- पुरानी चोट का कैंसर में बदलना
- कैंसर का शरीर के दूसरे हिस्से में फैलना

बॉक्स
बोन कैंसर के लक्षण- हड्डियों में दर्द
- प्रभावित क्षेत्र में सूजन और कोमलता
- हड्डी का टूटना
- थकान
- बिना कारण वजन घटना- जोड़ों में अकड़न
- अन्य
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