अगली सुनवाई से एक दिन पहले जवाबी रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। यमुना में अवैध बालू खनन से जुड़े मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने आगे की सुनवाई के निर्देश दिए हैं। मामले में एनजीटी ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश और गौतमबुद्ध नगर के सात वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को पक्षकार बनाया है। अब इन अधिकारियों को अवैध खनन रोकने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देनी होगी। एनजीटी की प्रधान पीठ ने मामले में आदेश जारी किया। पीठ ने कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर उचित फैसला लेने के लिए कुछ जरूरी पक्षों को मामले में शामिल करना और उनका पक्ष सुनना जरूरी है।
एनजीटी ने जिलाधिकारी बागपत, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बागपत, जिलाधिकारी गौतम बुद्ध नगर, पुलिस आयुक्त गौतम बुद्ध नगर, पुलिस आयुक्त दिल्ली, पुलिस आयुक्त गाजियाबाद और जिलाधिकारी बाहरी उत्तरी दिल्ली को मामले में नए प्रतिवादी के तौर पर शामिल किया है। इन सभी अधिकारियों को अगली सुनवाई से कम से कम एक दिन पहले अपनी जवाबी रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। अधिकरण ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अवैध खनन रोकने के लिए बनाई गई संयुक्त टास्क फोर्स की भूमिका पर भी जानकारी मांगी है। इसमें टास्क फोर्स की हर तीन महीने में होने वाली बैठकों, उनके कार्यवृत्त और इन जानकारियों को सरकारी वेबसाइट पर अपलोड किए जाने की स्थिति शामिल है।
कार्रवाई की समीक्षा की जाएगी
इसके अलावा दिल्ली-उत्तर प्रदेश की सीमा से जुड़े इलाकों में खनन, संयुक्त गश्त और अवैध खनन रोकने के लिए पुलिस अधिकारियों की ओर से की गई कार्रवाई की भी समीक्षा की जाएगी। एनजीटी ने गाजियाबाद, दिल्ली और गौतमबुद्ध नगर के पुलिस आयुक्तों तथा बागपत के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की ओर से अवैध खनन रोकने के लिए उठाए गए कदमों पर भी स्पष्टीकरण जरूरी माना है। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर 2026 को होगी। यह मामला एक मीडिया रिपोर्ट में 30 नवंबर 2024 को प्रकाशित यमुना में दिल्ली और गाजियाबाद के बीच बालू खनन से जुड़ी खबर के आधार पर एनजीटी द्वारा स्वत: संज्ञान लेकर शुरू किया गया था।