कचरे को उपयोग में लाने और धनार्जन का भी निर्देश
एलजी ने गाजीपुर लैंडफिल साइट पर अपशिष्ट से ऊर्जा उत्पन्न करने वाले संयंत्र को जल्द से जल्द चालू करने का निर्देश दिया, ताकि साइट पर ताजा कचरा कम किया जा सके। एलजी ने अधिकारियों से कहा कि वह पता लगाएं कि एनएचएआई दूसरे राज्यों से सड़कों के निर्माण के लिए किस तरह का कचरा ले रहा है, इसके अलावा एनसीआर में बिल्डरों से संपर्क कर सीएंडडी कचरे को बेचने की संभावनाएं भी तलाशने के लिए कहा है। इससे निगम को राजस्व लाभ की संभावना है। उन्होंने इस काम को आगे बढ़ाने के लिए विशेषज्ञों से राय लेने के लिए कहा है।
कूड़े के तीन पहाड़ों पर 270 लाख मीट्रिक टन कचरा
गाजीपुर लैंडफिल साइट करीब 70 एकड़ क्षेत्रफल में फैली है और यहां पर करीब 140 लाख मीट्रिक टन कचरा फैला है। पूर्वी दिल्ली क्षेत्र में रोजाना करीब 2,600 मीट्रिक टन कचरा उत्पन्न होता है। इसी तरह उत्तरी दिल्ली के भलस्वा लैंडफिल साइट पर 80 लाख मीट्रिक टन और दक्षिणी दिल्ली में ओखला लैंडफिल साइट पर करीब 50 लाख मीट्रिक टन कचरा फैला है। इन साइटों पर ठोस कचरा तीन श्रेणियों रिफ्यूज्ड व्युत्पन्न ईंधन (आरडीएफ), निर्माण और विध्वंस (सीएंडडी) और निष्क्रिय अपशिष्ट के रूप में आता है। आरडीएफ कचरे का उपयोग अपशिष्ट से बिजली उत्पन्न करने के लिए किया जा रहा है। एनएचएआई द्वारा अपनी सड़कों के निर्माण के लिए थोड़ी मात्रा में निष्क्रिय अपशिष्ट लिया जा रहा है, जबकि संशोधित सीएंडडी कचरे का उपयोग निर्माण और गड्ढों को भरने के लिए किया जा रहा है।