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Domestic Violence In Delhi : ...मेरे हाथों में पड़े निशान बयां कर रहे हैं हिंसा की सच्चाई, दिल्ली में बढ़े घरेलू हिंसा के मामले

Fri, 20 May 2022 06:13 AM IST
दुष्यंत शर्मा परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली

सार

दिल्ली में बढ़ते लैंगिक अपराधों की ताजा तस्वीर। महामारी के बाद से घरेलु हिंसा के मामले बढ़े। यूपी के बाद दिल्ली दूसरे स्थान पर, जहां बीते चार महीने में दर्ज हुईं सबसे अधिक शिकायतें। 
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घरेलू हिंसा पीड़ित महिलाओं की काउंसलिंग और कंप्यूटर शिक्षा देती एनजीओ कार्यकर्ता - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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साहब, ये मेरे हाथों पर आप जो काले धब्बे के निशां देख रहे हैं। ये हिंसा की सच्चाई बयां कर रहे हैं। इस आदमी ने मुझे इतना मारा है, मेरे हाथों में काले धब्बे पड़ गए हैं। मेरा काम छूट गया, घर में खाने को कुछ नहीं। बच्चे मुझसे खाना मांगें तो मैं इसे ही लेने के लिए बोलूंगी ना, इसी बात पर यह मुझे मारता है क्योंकि सारा पैसा यह नशे में उड़ाता है। यह पीड़ा 35 वर्षीय एक महिला की है जिनकी 14 वर्षीय बेटी निशा एक एनजीओ के केंद्र पर जाकर कामकाज सीख रही है। निशा की मां बताती है, लॉकडाउन से मेरा पति घर में बैठा है। पिछले साल तक मैं काम कर रही थी लेकिन इसकी मारपीट के बाद मुझसे ज्यादा काम नहीं हो पाता है। मेरे हाथ कांपने लगते हैं और दर्द होने लगता है। इसलिए मेरी बेटी एनजीओ में जाकर कामकाज सीख रही है और बेटा मजदूरी कर रहा है। यह परिवार बीते 12 वर्षों से दिल्ली के उत्तम नगर इलाके में रहता है। 

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निशा की तरह दिल्ली में ऐसे कई परिवार हैं जो घरेलु हिंसा की गिरफ्त में हैं। राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) से मिली जानकारी के अनुसार इस साल महज चार महीने में 273 महिलाओं की शिकायत दर्ज की गई है। जबकि बीते पूरे साल 2021 में कुल 1180 मामले सामने आए थे। आयोग के अनुसार इस साल घरेलु हिंसा के मामले में दिल्ली उत्तर प्रदेश के बाद देश में दूसरे स्थान पर है। 

दिल्ली के मोहन गार्डन निवासी 25 वर्षीय पूजा बताती हैं, मैं अपनी बहन को मम्मी के जाने के बाद ऐसे नहीं छोड़ सकती, मेरे पापा शराब पीते हैं, उनको कोई होश नहीं रहता है। अगर इस बीच मेरी बहन के साथ कुछ ऊचा-नीचा हो गया तो मैं क्या करूंगी। पूजा अपनी छोटी बहन ऊषा (आठ वर्षीय) को लेकर रोजाना दिल्ली सरकार के प्रशिक्षण केंद्र जाती हैं। वो मानती हैं, इससे ऊषा की पढ़ाई प्रभावित हो रही है लेकिन दिन में एक घंटा वह उसे खुद पढ़ाती है। पूजा का भी कहना है कि कोरोना महामारी के बाद से उनके घर में लड़ाई-झगड़ा बढ़ गया है। उनके भाई की मौत 2021 में आई दूसरी लहर में हुई थी। वह एक एंबुलेंस चला रहा था और खुद संक्रमित हो गया। उसे कहीं अस्पताल में बिस्तर भी नहीं मिल पाया था। उनके परिवार की आमदनी का स्त्रोत उनका भाई था। 
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हाल ही में जारी दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ आपराधिक मामलों में साल 2019 से 2021 के बीच करीब 12 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वहीं राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के अनुसार घरेलु हिंसा के 80 फीसदी से अधिक मामलों में अपराधी पति होते हैं। जिन्होंने 12वीं या उससे अधिक की पढ़ाई पूरी की है उनमें घरेलु हिंसा की आशंका आधी (21%) होती है। जबकि अशिक्षित पतियों में यह आशंका 43 फीसदी तक दर्ज की गई है। 

छह साल में दोगुना पहुंचे मामले: अध्ययन
साल 2000 से 2018 के बीच राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो रिकॉर्ड (एनसीआरबी) के आंकड़ों पर पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने एक अध्ययन किया है जिसे बीएमसी मेडिकल जर्नल में भी प्रकाशित किया गया। इसके अनुसार साल 2012 के बाद से अन्य राज्यों की तुलना में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में दुष्कर्म के मामले प्रति एक लाख महिलाओं पर 49.3 दर्ज किए जा रहे हैं जोकि करीब दोगुना के बराबर हैं। शोधार्थी डॉ. राखी डंडोना ने कहा कि दिल्ली सहित देश भर में महिलाओं के खिलाफ आपराधिक मामले कम नहीं हो रहे। ऐसे में हमें इन अपराधों के बोझ को बेहतर ढंग से समझने के लिए जनसंख्या स्तर पर अधिक डेटा की आवश्यकता है। इसी के जरिए यह पता चल सकता है कि वास्तव में इनमें से किस अनुपात में आपराधिक मामलों की शिकायतें न्यायालय तक पहुंची हैं। 

70 फीसदी मामलों में शराब की भूमिका
प्रोत्साहन फाउंडेशन ऑफ इंडिया की सीईओ सोनल कपूर बताती हैं, हमारे पास एक या दो नहीं, बल्कि काफी संख्या में घरेलू हिंसा के मामले सामने आते हैं। उन्होंने बताया कि कोरोना महामारी के बाद से हिंसा की कहानियों में और विविधिता आई है। नशा ही नहीं, कई परिवारों में खाने या फिर बच्चों की पढ़ाई को लेकर ही पत्नी से मारपीट के किस्सों का अनुभव किया जा रहा है। एक अनुमान के मुताबिक  जिन महिलाओं के पति अक्सर शराब पीते हैं उनमें से 70 फीसदी महिलाओं ने शारीरिक या यौन हिंसा का अनुभव किया है। जबकि बाकी 30 फीसदी मामलों में नशा की भूमिका भी नहीं है। 

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