नर्सों की सक्रिय भूमिका से एंटीबायोटिक का सही इस्तेमाल बढ़ा
नई दिल्ली। अस्पतालों के आपातकालीन विभाग में नर्सों की सक्रिय भागीदारी से एंटीबायोटिक दवाओं का सही और जिम्मेदार तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे मरीजों के इलाज की गुणवत्ता में सुधार के साथ संक्रमण नियंत्रण भी बेहतर हुआ है।
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) का यह अध्ययन एक तृतीयक (सुपर स्पेशियलिटी) अस्पताल के आपातकालीन चिकित्सा विभाग में किया गया। अध्ययन के तहत प्रशिक्षित नर्सों की टीम ने एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग की निगरानी की। डॉक्टरों को अस्पताल की उपचार संबंधी गाइडलाइन का पालन कराने में सहयोग किया गया, मरीजों की जांच प्रक्रियाओं पर नजर रखी और समय-समय पर समीक्षा व सुझाव दिए। अध्ययन में पाया गया कि इस पहल के बाद अस्पताल की एंटीबायोटिक गाइडलाइन का पालन 82.4 प्रतिशत से बढ़कर 91 प्रतिशत हो गया। वहीं, एंटीबायोटिक शुरू करने से पहले संक्रमण की जांच के लिए कल्चर टेस्ट कराने की दर 23 प्रतिशत से बढ़कर 40.3 प्रतिशत हो गई। इसके साथ ही कल्चर टेस्ट में संक्रमण की पहचान होने की दर भी 8 प्रतिशत से बढ़कर 22 प्रतिशत पहुंच गई। आईसीएमआर की डॉ. कामिनी वालिया ने बताया कि यह भी पाया गया कि जरूरत के अनुसार एंटीबायोटिक दवाओं में बदलाव (डी-एस्केलेशन) की प्रक्रिया में भी सुधार हुआ, जिससे अनावश्यक और अधिक शक्तिशाली एंटीबायोटिक के उपयोग में कमी आई। ब्यूरो