सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा है कि आखिर उसके आदेश के बावजूद पूर्व मुख्यमंत्रियों से सरकारी आवास क्यों नहीं खाली कराए गए। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को तीन हफ्ते में जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।
न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने राज्य केसंपदा विभाग केनिदेशक को नोटिस जारी करते हुए हलफनामे के जवाब दायर करने के लिए कहा है। अगली सुनवाई दो मई को होगी।
मालूम हो कि केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह, समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव, बसपा सुप्रीमो मायावती, कल्याण सिंह और एनडीतिवारी को यूपी का पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते सरकारी निवास मिला हुआ है। शीर्ष अदालत लोक प्रहरी नामक संगठन के सचिव एसएन शुक्ला द्वारा दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही है।
गत वर्ष अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बनाए गए उस नियम को निरस्त कर दिया है जिसमें राज्य के पूर्व मुख्यमंत्रियों को ताउम्र सरकारी आवास देने का प्रावधान था। शीर्ष अदालत ने इन सभी को दो महीने के भीतर लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास को खाली करने के लिए कहा था।
याचिकाकर्ता एसएन शुक्ला ने मंगलवार को पीठ को बताया कि इन पांचों पूर्व मुख्यमंत्रियों से अब तक सरकारी आवास खाली नहीं कराया गया है। पीठ ने अदालत कक्ष में मौजूद अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी से राजनाथ सिंह केबारे में जानना चाहा। जिस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि वह पता करेंगे कि राजनाथ सिंह ने सरकारी आवास खाली किया है या नहीं?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में उत्तर सरकार के पूर्व मुख्यमंत्री आवास आवंटन नियम, 1997 को कानूनन गलत बताया था। शीर्ष अदालत ने इन सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को न केवल दो महीने के भीतर सरकारी आवास खाली करने का आदेश दिया है बल्कि जितने समय तक इन लोगों ने अनधिकृत तरीके से सरकारी आवास पर कब्जा रखा था, उसका किराया भी वसूलने के लिए भी कहा था।