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Delhi News : गोकुल में सीख रहे हैं उद्यमी बनने के गुर, लक्ष्मीबाई कॉलेज की पहल

Mon, 11 Jul 2022 05:36 AM IST
दुष्यंत शर्मा रश्मि शर्मा, नई दिल्ली

सार

कॉलेज परिसर को छोटे गांव के रूप में विकसित कर नाम दिया गया है गोकुल। इसके बनने से कॉलेज के छात्र न केवल प्रकृति के नजदीक जा रहे हैं बल्कि उद्यमी बनने के गुर भी सीख रहे हैं।
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गोबर से बना मंडप... - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली में रहने वाले युवा गांव की संस्कृति और वहां के रहन-सहन से दूर हैं। ऐसे में लक्ष्मीबाई कॉलेज अपने छात्रों को गांव व प्रकृति के नजदीक लेकर जा रहा है। कॉलेज परिसर को छोटे गांव के रूप में विकसित कर नाम दिया गया है गोकुल। इसके बनने से कॉलेज के छात्र न केवल प्रकृति के नजदीक जा रहे हैं बल्कि उद्यमी बनने के गुर भी सीख रहे हैं। इसमें एक यज्ञशाला भी स्थापित की गई जिसमें समय-समय पर हवन किया जाता है ताकि वायु को भी शुद्ध किया जा सके।

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कॉलेज परिसर में यह सब प्रयास प्रिंसिपल डॉ. प्रत्युष वत्सला ने किए हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली में युवाओं को गांव की जिंदगी का पता नहीं चलता है। ऐसे में सोचा गया कि क्यों ना उन्हें प्रकृति के करीब लेकर जाया जाए। इस विचार के पीछे छात्रों को उद्यमी बनाने का भी सोचा गया। इस साल की शुरुआत में इस विचार पर काम करना शुरू किया और अब इसे तैयार कर लिया गया है। उनके प्रयासों से गोकुल में गाय व बछिया को भी रखा गया है।

मिट्टी से जोड़ रहा झूला, झोंपड़ी और तालाब
गांव के रुप में विकसित किए गए गोकुल में एक झूला, झोंपड़ी और तालाब भी है, जो कि छात्रों को मिट्टी से जोड़ रहा है। तालाब में डेंगू मच्छर खाने वाली मछलियों को डाला गया है और घांस-फूस से एक शेड तैयार किया गया है। यहां बतख और खरगोश भी छात्रों को आकर्षित करते हैं। यहां छात्र खाद बनाना सीख रहे हैं और आर्गेनिक खेती भी हो रही है। इससे छात्रों को मिट्टी से जुड़े रहने का अहसास हो रहा है। ईकोपार्क, बॉयोगैस प्लांट और सोलर पैनल भी लगाए गए हैं।
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गोबर से सजावटी सामान बनाने का प्रशिक्षण देने की तैयारी
डॉ. प्रत्युषा कहती हैं कि ऐसा पता चला है कि गोबर से भी सजावटी सामान तैयार किया जा सकता है। ऐसे में युवाओं को इन सामान को बनानेे के प्रशिक्षण देने की तैयारी की जा रही है। इसमें स्लम में रहने वाले लोगों की मदद भी ली जाएगी। वहीं गोबर से लकड़ी बनाने के लिए गो कॉस्ट मशीन लाने की भी तैयारी कॉलेज कर रहा है। इन सबके पीछे उद्देश्य छात्रों में उद्यमिता के कौशल विकसित करना है।

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