नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने ग्रोथ हार्मोन की बीमारी से जूझ रही 17 वर्षीय स्कूली छात्रा के निशुल्क इलाज के मुद्दे पर केंद्र, दिल्ली सरकार एवं अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने सभी पक्षों को 10 मार्च तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति प्रतिभा मनिंदर सिंह के समक्ष छात्रा ने सरकार द्वारा निशुल्क इलाज कराने या इलाज के लिए वित्तीय सहायता मुहैया कराने की मांग की है। सरकारी स्कूल में 10वीं कक्षा का छात्रा फ्रूटी की ओर से पेश अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने अदालत को बताया कि उनकी मुवक्किला ग्रोथ हार्मोन की बीमारी से पीड़ित है।
उन्होंने कहा कि इससे निजात पाने के लिए उसे हारमोंस का इंजेक्शन लेना होगा और इस पर करीब छह लाख रुपये का खर्च आएगा। उनकी मुवक्किला आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आती है और अपने खर्च पर इलाज करवाने में असमर्थ है। सरकार को उनकी मुवक्किला का एम्स में निशुल्क इलाज करवाने या उसे वित्तीय सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया जाए।
उन्होंने कहा कि सरकार का दायित्व है कि वह उसका मुफ्त में इलाज करें। ऐसा नहीं होने पर उसका विकास रुक जाएगा और उसे दिल, किडनी के साथ-साथ कई अन्य बीमारियां होने का भी खतरा है।