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बजट की बात : हवा में घटेगा पराली का धुआं, दिल्ली-एनसीरआर की बेहतर होंगी सांसें

Wed, 02 Feb 2022 05:08 AM IST
दुष्यंत शर्मा किशन कुमार, नई दिल्ली

सार

केंद्रीय बजट में बायोमास पैलेट को विद्युत ताप केंद्रों में इस्तेमाल करने की घोषणा। सराकार का दावा नई पहल से खेतों में पराली जलने से रोका जा सकेगा।
 
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demo pic - फोटो : PTI
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विस्तार
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केंद्रीय बजट में पर्यावरण की दिशा में बेहतर सुधार करने के लिए बायोमास पैलेट को हथियार बनाने की बात कही गई है। इससे खेतों से पराली की समस्या खत्म होगी व दिल्ली-एनसीआर में लोग बेहतर हवा में सांस ले सकेंगे। सरकार इसके लिए बायोमास पैलेट को ईंधन के रूप में विद्युत ताप केंद्रों में इस्तेमाल करेगी, जिससे खेतों में पराली की जलने की समस्या कम हो सकेगी।

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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में कहा है कि पांच से सात फीसदी  बायोमास पेलेट को थर्मल पावर प्लांटों में जलाया जाएगा, जिससे प्रतिवर्ष 38 एमएमटी कार्बन डाईऑक्साइड की बचत होगी। वित्त मंत्री का कहना है कि इस कदम से किसानों को अतिरिक्त आय होगी और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी उपलब्ध होंगे।

साथ ही खेतों में पराली को जलाने से भी रोका जा सकेगा।इस संबंध में पर्यावरण मूल्यांकन समिति के सदस्य व केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड(सीपीसीबी) के पूर्व अतिरिक्त निदेशक डॉ. दीपांकर शाहा कहते हैं कि सरकार के इस नए कदम से दिल्ली-एनसीआर में पराली के प्रदूषण को लेकर समस्या कम हो सकती है। क्योंकि, हर साल सितंबर के अंत से लेकर नवंबर तक पड़ोसी राज्यों में पराली जलने की घटनाएं दर्ज की जाती हैं। इससे हर साल दिल्ली-एनसीआर में रह रहे लोगों की सांसों पर संकट खड़ा हो जाता है।
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लांकि, इस नए पहले के लिए सरकार को मजबूत तंत्र बनाने की आवश्यकता होगी। अभी विद्युत ताप केंद्र में कोयला जलने की वजह से बड़े स्तर पर हवा में कार्बन की मात्रा घुलती है और हवा जहरीली हो जाती है। वहीं, बायोमास जलने से कार्बन का उत्सर्जन कम होगा व हवा भी कम जहरीली होगी और पराली की समस्या भी कम होगी। 

वहीं, सीपीसीबी के पूर्व अतिरिक्त निदेशक डॉ. एसके त्यागी के मुताबिक, बायोमास को पैलेट बनाने के लिए अलग से तंत्र स्थापित करने की आवश्यकता होगी। इससे लोगों के लिए रोजगार के अवसर बंद इसके बाद ही इसे विद्युत ताप केंद्रों में इस्तेमाल किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि पराली में बड़े स्तर पर सिलिका मौजूद होता है जो कि जलने पर बॉयलर में जम सकता है, जिससे इससे दक्षता पर प्रभाव पड़ सकता है।

हालांकि, इसे ईट के भट्टों में इस्तेमाल करने का बेहतर विकल्प है। गौरतलब है कि हर साल सर्दी की शुरुआत के साथ ही दिल्ली-एनसीआर में हवा की सेहत खराब हो जाती है, जिससे लोगों को अस्थमा व सांस संबंधित अन्य बीमारियों से जूझना पड़ता है। हवा के बिगड़ने के लिए पराली जलने से होने वाले प्रदूषण को भी हवा की  बिगड़ी सेहत के लिए जिम्मेदार माना जाता है। 

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