कोरोना काल में अग्रिम पंक्ति में काम कर रहे डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल पा रहा है। अब तक उत्तरी दिल्ली नगर निगम के अंतर्गत आने वाले तीन बड़े अस्पतालों के डॉक्टरों और नर्सिंग कर्मचारी हड़ताल की घोषणा कर चुके हैं। हिंदूराव और कस्तूरबा गांधी के बाद बुधवार को राजन बाबू टीबी अस्पताल के कर्मचारियों ने भी वेतन नहीं तो काम नहीं का ऐलान कर दिया था। रेजीडेंट डॉक्टरों के राष्ट्रीय दल ने भी हड़ताल का समर्थन किया है।
बुधवार को हिंदूराव अस्पताल में हड़ताल पर बैठे डॉक्टरों का समर्थन करने के लिए फेडरेशन ऑफ रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (फोर्डा) की टीम भी पहुंची। उधर, महापौर जयप्रकाश का कहना है कि राजन बाबू के डॉक्टर व नर्स हड़ताल पर थे। इनके प्रतिनिधिमंडल के साथ सभी मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई, जिसके बाद उन्होंने हड़ताल खत्म करने का फैसला किया है।
फोर्डा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शिवा ने हिंदूराव में हड़ताल पर बैठे डॉक्टरों से इस बार ठोस कदम उठाने के लिए कहा है। उत्तरी दिल्ली नगर निगम के कर्मचारियों को हर बार पेंशन या वेतन के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। कभी दो तो कभी चार महीने तक वेतन नहीं दिया जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि निगम से अस्पताल नहीं चल रहे हैं तो केंद्र या दिल्ली सरकार को सौंप दिए जाए।
डॉ. शिवा का कहना है कि ज्यादा दिन तक यह स्थिति नहीं चलेगी। अगर निगम ने डॉक्टरों को वेतन नहीं दिया और दिल्ली या केंद्र सरकार ने भी सुनवाई नहीं की तो आगामी दिनों में हड़ताल का स्तर बड़ा हो सकता है।
उधर, कस्तूरबा गांधी अस्पताल में बुधवार से कर्मचारियों ने हड़ताल शुरू की। यहां 20 अक्तूबर तक हड़ताल पर रहने की घोषणा की गई है। इसके बाद भी वेतन नहीं मिलता है तो डॉक्टर हड़ताल को आगे बढ़ा सकते हैं।
डिस्पेंसरी तक के डॉक्टर एकजुट
उत्तरी निगम की डिस्पेंसरी तक के डॉक्टर एकजुट हो गए हैं। नगर निगम डॉक्टर्स एसोसिएशन ने उत्तरी दिल्ली नगर निगम के आयुक्त को पत्र लिखकर 19 अक्तूबर से हड़ताल की चेतावनी दी है। पत्र में लिखा है कि उन्हें तीन माह से वेतन नहीं मिला है। एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. आरआर गौतम ने मांग रखी है कि तत्काल वेतन दिलाने के साथ लंबित भत्ते, पेंशन और बजट की कमी का स्थायी समाधान होना चाहिए। हालांकि, डॉक्टरों ने आपात चिकित्सीय सेवाओं को हड़ताल से अलग रखने का फैसला लिया है।