पंजाबी बाग में भारत दर्शन पार्क के अंदर स्वर्ण मंदिर बनाने का मामला तूल पकड़ चुका है। पार्क के अंदर वेस्ट मटेरियल से स्वर्ण मंदिर की प्रतिकृति बने यह बात दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी को मंजूर नहीं है। श्री हरमिंदर साहिब स्वर्ण मंदिर सिख धर्मावलंबियों के लिए उनका सबसे पावन धार्मिक स्थल है।
गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी पार्क में वेस्ट मटेरियल से बनाए गए स्वर्ण मंदिर की प्रतिकृति को अपने धर्म से जोड़कर देखा है और उन्होंने कहा है कि इससे उनकी भावनाएं आहत हुई हैं। जबकि दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के महापौर मुकेश सूर्यान ने पार्क में की गई तोड़फोड़ को केवल राजनीति बताया है।
उन्होंने कहा है कि जब इस पार्क का निर्माण कार्य शुरू हुआ था तो आज इसका विरोध करने वाले इसके साथ खड़े थे। पंजाबी बाग में दक्षिणी दिल्ली नगर निगम की महत्वाकांक्षी परियोजना भारत दर्शन पार्क का 3 जनवरी 2020 को केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने एलजी अनिल बैजल ने शिलान्यास किया था।
महापौर मुकेश सूर्यान ने कहा है कि यकीन नहीं होता कि दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा आखिर क्यों इसका विरोध कर रहे हैं। अभी इस मामले में उन्होंने और कुछ भी बोलने से मना कर दिया है। फिलहाल सोमवार की घटना के बाद से यहां पर शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पार्क के आस पास पुलिस तैनात है।
क्या है स्वर्ण मंदिर की प्रतिकृति तोड़ने का मामला
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन ने सोमवार को पार्क में बनाए जा रहे स्वर्ण मंदिर के प्रतिरूप को तोड़ दिया गया था। उन्हें पार्क में वेस्ट मटेरियल से स्वर्ण मंदिर की प्रतिकृति बनाना किसी कीमत पर मंजूर नहीं है। महापौर ने कहा कि अभी इस मुद्दे को यथा स्थिति छोड़ देने में भलाई है। सिख समुदाय के अन्य प्रमुख लोगों और मंत्रालय से बातचीत की जा रही है। जल्द ही इसपर उचित निर्णय लिया जाएगा। महापौर ने कहा है कि भारत दर्शन पार्क को जिस सोच के साथ बनाया जा रहा है, हम उसे हर हाल में कायम रखेंगे।
'विविधता में एकता' की थीम पर बनाया जा रहा पार्क
दक्षिणी दिल्ली नगर निगम पंजाबी बाग में 'विविधता में एकता' थीम पर भारत दर्शन पार्क बना रहा है। 8 एकड़ में से 6 एकड़ में वेस्ट टु वंडर पार्क की तर्ज पर भारत के 18 ऐतिहासिक स्मारकों की हूबहू प्रतिकृतियां बनाई जा रही हैं। पार्क के अंदर ताजमहल, कुतुबमीनार, मैसूर मंदिर, मीनाक्षी मंदिर, हंपी मंदिर, मैसूर पैलेस, हवा महल जैसी प्रतिकृतियों को कबाड़ से बनाने की प्लानिंग है। करीब 22 फुट ऊंचे अमृतसर के स्वर्ण मंदिर की प्रतिकृति को सबसे पहले बनाया गया था। इसके ऊपरी हिस्से को सोमवार को तोड़ दिया गया, इसके बाद से मामला गरमा गया है।