न्यायमूर्ति संजीव नरूला ने निर्दलीय प्रत्याशी रहे रमेश द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया। जिसमें उन्होंने लेखी के चुनाव खर्च में विसंगतियों और भ्रष्ट चुनाव प्रथाओं में संलिप्तता के आरोप लगाए थे। अदालत ने पाया कि चुनाव याचिका में मूल रूप से भौतिक तथ्यों का अभाव है। इसमें कहा गया है कि बिना किसी ठोस सामग्री के रमेश के व्यापक कथन चुनावी भ्रष्ट आचरण के आरोपों को बनाए रखने के लिए अपर्याप्त है।
न्यायमूर्ति नरूला ने कानूनी प्रक्रिया में पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत और अच्छी तरह से समर्थित दलीलें प्रदान करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम विशिष्टता की आवश्यकता पर जोर देता है और विवरण में गए बिना अस्पष्ट आरोप लगाना पर्याप्त नहीं है।