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Delhi: जी-20 से पहले बदल जाएगा 250 साल पुराना मुगलों का सफदरजंग मकबरा, पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा; पढ़ें इतिहास

Thu, 25 May 2023 08:13 AM IST
अनुज कुमार आशीष सिंह, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिल्ली में मुगलों की आखिरी निशानी के तौर पर 250 साल पुराने सफदरजंग के मकबरे की मरम्मत कर उसे फिर से नया किया जाएगा। राजधानी में होने वाली जी-20 की बैठक से पहले इस काम को पूरा किया जाएगा।
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सफदरगंज का मकबरा - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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राजधानी दिल्ली में मुगलों की आखिरी निशाना सफदरजंग के मकबरे का कायाकल्प किया जा रहा है। 250 साल पुराने मकबरे की मरम्मत की जा रही है और इसके साथ ही यहां आने वाले पर्यटक इसके नए रूप का दीदार कर सकेंगे। मुगल सल्तनत की आखिरी वास्तुकला के नायाब नमूने सफदरजंग मकबरे का कायाकल्प किया जा रहा है। 250 साल से अधिक पुराने इस ऐतिहासिक मकबरे की मुख्य गुंबद की मरम्मत कर इसकी दशा सुधारी जा रही है। इसमें पीले पड़े और खराब पत्थरों को निकालकर उसकी जगह नए पत्थर लगाए जा रहे हैं। 

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सफदरजंग मकबरे की होगी मरम्मत
गुंबद के ऊपर उगी घास को हटाकर इनके जोड़ को भरा जा रहा है, जिससे इसमें फिर दोबारा घास न उग सके। गुंबद के संरक्षण में मकराना के सफेद पत्थर का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे वह जल्द ही अपने नए रंग-रूप में नजर आएगा। इसकी पहली मंजिल में जगह-जगह से उखड़ी और टूटी जालियों को हटाकर पत्थर की जालियां लगाने की भी योजना है। स्मारक में चारों ओर रंग-बिरंगी लाइटें भी लगाई जाएंगी, जो रात में पर्यटकों को आकर्षित करेंगी। 

जी20 की बैठक को लेकर विदेशी सैलानियों के लिए तैयारियां जोरों पर
इसका फर्श भी कई जगह से टूट गया है, जिसे लाल बलुआ पत्थर से दुरुस्त किया जा रहा है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा 30 वर्ष के बाद इसके संरक्षण का कार्य किया जा रहा है। जी-20 शिखर सम्मेलन की बैठक को लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। दरअसल इस दौरान बैठक में शामिल होने के लिए कई देशों के राष्ट्र अध्यक्ष और राष्ट्र प्रमुख राजधानी दिल्ली आएंगे, जिसमें वह यहां की धरोहर और विरासत देखने पहुंचेंगे। 

बता दें कि मकबरे में बारिश और बिजली गिरने से गुंबद में लगे पत्थर जगह-जगह से उखड़ गए थे। स्मारक के मुख्य द्वार में संरक्षण का कार्य एक माह में शुरू होगा। इसके तहत इनमें खराब हो चुके या टूट चुके पत्थरों को बदला जाएगा। इसके संरक्षण के लिए राजस्थान के मकराना से कारीगर बुलाए गए हैं। सीनियर कंजर्वेशन असिस्टेंट देवेंद्र कुमार ने बताया कि गुंबद का दो चरणों में संरक्षण कार्य किया जा रहा है। मकबरे के आर्च को भी बदले जाने की योजना है। इसे फिर से पुनर्जीवित किया जाएगा।
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सफदरजंग मकबरे का इतिहास
सफदरजंग के मकबरे का निर्माण 1753-54 में नवाब शुजाउद्दौला ने अपने पिता मिर्जा मुकीम अबुल मंसूर खान (जिनकी उपाधि सफदरजंग थी) की स्मृति में करवाया था। इसमें सफदरजंग और उसकी बेगम की कब्र बनी हुई है। यह दो मंजिला इमारत है। इसमें तीन महल हैं, पहला जंगल महल (पैलेस ऑफ वुड्स), दूसरा मोती महल (पर्ल पैलेस) और तीसरा बादशाह पसंद (किंग्स फेवरिट) है। सफदरजंग का जन्म 1708 में ईरान के निशापुर में हुआ था। उसकी मृत्यु 1754 में सुल्तानपुर (उत्तर प्रदेश) में हुई थी।

एएसआई दिल्ली सर्कल चीफ व सुपरिटेंडेंट आर्कियोलॉजिस्ट प्रवीण सिंह ने बताया कि  इसे देखने के लिए रोजाना सैकड़ों देशी-विदेशी पर्यटक आते हैं। इसके संरक्षण को लेकर लंबे समय से प्रक्रिया चल रही थी। अब दर्शकों को यह नए रंग रूप में दिखेगा। यह दिल्ली की पुरानी व ऐतिहासिक इमारतों में से एक है, जिसका संरक्षण करना बेहद जरूरी है। 
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