नई दिल्ली। केंद्र सरकार देश में पर्यावरण को बनाए रखने के प्रति गंभीर नहीं है। यही कारण है कि सरकार राजनीतिक पार्टियों के प्रत्याशियों को चुनावों के दौरान निशुल्क वोटर लिस्ट व अन्य दस्तावेज प्रदान करने के निर्णय पर जवाब दाखिल करने से बच रही है। हाईकोर्ट याची के इस तर्क पर केंद्र को मामले में जल्द जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि निशुल्क वोटर लिस्ट प्रदान करने के लिए चुनाव आयोग को करीब 50 करोड़ रुपये वहन करने पड़ते हैं। वहीं वोटर लिस्ट के कागज के लिए लाखों पेड़ों को काटा जाता है जिससे पर्यावरण को नुकसान होता है।
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल व न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की खंडपीठ के समक्ष याची आकाश गहलोत के अधिवक्ता हरज्ञान सिंह गहलोत ने कहा कि यह मामला चुनावों से ज्यादा पर्यावरण से जुड़ा है, इसके बावजूद केंद्र सरकार गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा जनहित व पर्यावरण के मुद्दे पर भी केंद्र सरकार गंभीर नहीं है। हर बार जवाब के लिए समय मांगा जाता है। ऐसे में सरकार का आग्रह खारिज कर आदेश पारित किया जाए। अदालत ने केंद्र को जल्द जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए सुनवाई 13 सितंबर तय कर दी।
याचिका में कहा गया है कि तय कानून के तहत पंजीकृत पार्टियों के प्रत्याशियों को चुुनावों में निशुल्क वोटर लिस्ट व अन्य दस्तावेज प्रदान किए जाते हैं। देशभर में हर राज्य में 8 से 10 पंजीकृत पार्टियां हैं। संसद के 543 व विधानसभा के लिए 4036 विधायकों को चुना जाता है। उन्होंने कहा कि चुनावों के दौरान तो सभी प्रत्याशी वोटर लिस्ट इत्यादि का इस्तेमाल करते हैं लेकिन उसके बाद इसे रद्दी में बेच दिया जाता है। यह दुरुपयोग है।
याची ने हाल ही में मध्य प्रदेश का हवाला देते हुए कहा कि 25 विधायकों ने चुनाव के 15 माह बाद ही त्यागपत्र दे दिया। इतना ही नहीं उन्होंने पुन: चुनाव लड़ा व फिर सभी दस्तावेज निशुल्क प्राप्त किए। यह सब सरकारी खर्च पर लिया गया जबकि उस समय देश कोरोना से जूूझ रहा था।
याची ने कहा कि वोटर लिस्ट इत्यादि के कागज के लिए लाखों पेड़ों को काटा जाता है। इसके अलावा इंक पर काफी खर्च होता है। पेड़ों को काटने से पर्यावरण को नुकसान हो रहा है। याची ने कहा कि इसके अलावा मात्र पंजीकृत पार्टियों के प्रत्याशियों को निशुल्क वोटर लिस्ट देने से चुनाव लड़ने वाले अन्य प्रत्याशियों से यह भेदभाव और समानता के अधिकार का हनन है।
उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि प्रत्याशियों को निशुल्क वोटर लिस्ट व अन्य दस्तावेज प्रदान करने के प्रावधान को रद्द किया जाए। इसके अलावा सरकार को पर्यावरण की रक्षा के लिए उक्त दस्तावेज डिजिटल माध्यम से प्रदान करने का निर्देश दिया जाए।