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दिल्ली में लूट-खसोट : राजधानी में पीजी का मतलब है 'पैसा घर', एक बेड का 15 हजार

Mon, 21 Feb 2022 06:08 AM IST
दुष्यंत शर्मा रश्मि शर्मा, नई दिल्ली

सार

जैसा रूम वैसा ही किराया, 10 से 20 हजार रुपये माह में मिलता है पीजी का बेड। लंबे समय बाद कॉलेज खुलने से पीजी संचालकों ने भी बढ़ाए दाम।
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डीयू के आसपास... - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कोरोना महामारी के कारण बंद दिल्ली विश्वविद्यालय बीते दो साल बाद खुल गया है। अचानक कॉलेज खुलने से बाहरी राज्यों के छात्रों के लिए परेशानी खड़ी हो गयी है। दरअसल एक तो उन्हें रहने केलिए कमरों की तलाश करनी पड़ रही हैं, वहीं कमरों के किराए भी जेब पर भारी पड़ रहे हैं। एक बेड, एक अल्मारी और एक टेबल कुर्सी के लिए छात्रों को औसतन 10 से 15 हजार रुपये देने पड़ रहे हैं। बाहरी राज्यों के छात्रों की मंहगी मजबूरी बने यह पीजी भी किसी को मिल पा रहें हैं, किसी को नहीं। 

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इस कारण से कॉलेजों में अभी पहले वर्ष के छात्रों की उपस्थिति भी कम बनी हुई है। दिल्ली विश्वविद्यालय केआसपास के इलाकों में चल रहे पीजी व किराए के कमरे सुविधाओं को देने के नाम पर छात्रों से मुंह-मांगी कीमतें वसूल रहे हैं। डीयू में दाखिलों की संख्या के मुकाबले में हॉस्टल में सीटों की संख्या कम होने के कारण छात्रों को मजबूरी में पीजी में रहना पड़ रहा है। 

डीयू में बाहरी राज्यों के छात्रों की बात की जाए तो खासकर यूपी, बिहार, राजस्थान, हरियाणा, उत्तर पूर्वी राज्यों व उतराखंड के लगभग 70 फीसदी छात्र दाखिला लेते हैं। सीमित संख्या में हॉस्टलों में होने के कारण अधिकांश को दाखिला नहीं मिल पाता है। लिहाजा आसपास के इलाकों में पीजी में ही रहना पड़ता है। उत्तरी दिल्ली  की बात की जाए या दक्षिणी दिल्ली के इलाकों की एक रुम में दो से तीन बेड की व्यवस्था है। इस तरह से छात्रों से प्रति बेड औसतन 10 से 15 हजार रुपये वसूले जा रहे हैं। सुविधाओं के बढने पर एक बेड 22 हजार तक भी पहुंच रहा है। जिसमें एसी, सेफ्टी के लिए गार्ड, व अन्य सुविधाएं शामिल हैं। 
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दो साल बाद कॉलेज खुलने के कारण पीजी संचालकों ने किराए में इजाफा कर दिया है। नॉर्थ कैंपस के आसपास के इलाकों में ज्यादा रेट पर तो कैंपस से चार से पांच किलोमीटर की दूरी केपीजी थोड़ा कम किराया ले रहे हैं। 

नॉन एसी रूम में प्रति बेड जहां 10-15 हजार रुपये किराया है वहीं एसी रूम में यह प्रति बेड 12 से 20 हजार तक हो जाता है। यदि किसी पीजी में साइबर कैफे, जिम, टेबल टेनिल या अन्य इंडोर गेम की सुविधा मिलती है तो वहां का किराया प्रति बेड 20 हजार से अधिक है। अधिकतर छात्रों की पहली पंसद नॉर्थ कैंपस केआसपास का इलाका है क्योंकि यह कॉलेज के नजदीक है और मुखर्जी नगर, किंग्वैज कैंप, समेत अन्य इलाकों में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी हो जाती है। कोरोना महामारी के कारण कॉलेज-हॉस्टल बंद होने के कारण हॉस्टल की सीट आवंटित नहीं हो पा रही थी। अ्ब कुछ कॉलेजों ने आवंटन को शुरु किया है।   

इन इलाकों में पीजी व किराए के कमरे
उत्तरी दिल्ली में हडसन लाइन, विजय नगर, किंग्वैज कैंप, मुखर्जी नगर, क्रिश्चयन कॉलोनी, ईश्वर कॉलोनी, न्यू गुप्ता कॉलोनी, ओल्ड गुप्ता कॉलोनी, जवाहर नगर, चंद्रावल, कोल्हापुर, कमला नगर, नेहरु विहार, दक्षिणी दिल्ली में कालू सराए, कटवरिया सराए, आईएनए, गौतम नगर, मुनिरका गांव, नेब सराय, जामिया के आसपास ओखला, नूर नगर, जाकिर नगर, प्रीत विहार, लक्ष्मी नगर, करोल बाग में पीजी व किराए पर कमरों सबसे अधिक संख्या में उपलब्ध हो जाते हैं। 

क्या कहते हैं छात्र
कर्नाटका के वेणु ने डीयू में पहले वर्ष में दाखिला लिया है। उन्हें नॉर्थ कैंपस के आसपास के इलाकों में पीजी तलाशने में दिक्कत हुई। अब उन्होंने अपने दोस्त के साथ करोल बाग में पीजी लिया है। इसके लिए उन्हें 13 हजार रुपये प्रति बेड देने पड़ रहे हैं। हालांकि उन्हें अल्मारी उन्हें साझा करनी पड़ रही है। वेणु कहते हैं कि उनका बजट 10 हजार का था लेकिन कॉलेज में पढना है इसलिए 13 हजार रुपये देने पड़ रहे हैं। 

मध्य प्रदेश से डीयू में दाखिला लेने वाली चारू कहती हैं कि सीट की समस्या हॉस्टल में रहती ही है। ऐसे में पीजी लेना चाहती हूं। अब तक पीजी नहीं मिल पाया है। पीजी केकिराए बहुत ज्यादा हैं। अगले सप्ताह तक प्रयास कर रहीं हूं कि मेरे बजट में मुझे किराए का कमरा मिल जाए। परिवारवालों को पीजी में सुरक्षा की चिंता है। 

डीयू में हॉस्टल व सीटों की संख्या

  • डीयू यूजी में सीटों की संख्या 70 हजार
  • बाहरी राज्यों के छात्रों की संख्या 70 फीसदी लगभग
  • कॉलेज हॉस्टलों की संख्या  20 हॉस्टल
  • कॉलेज हॉस्टल सीटें 4 हजार लगभग
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