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आईसीयू में 80 प्रतिशत बेड आरक्षित रखने का आदेश अस्थायी: दिल्ली सरकार

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नई दिल्ली। राजधानी के 33 अस्पतालों में 80 फीसदी आईसीयू बेड कोरोना महामारी के लिए आरक्षित करने का आदेश अस्थायी तौर पर लिया गया था। इसका मकसद कोरोना महामारी का नियंत्रण था। यह दलील दिल्ली सरकार की ओर हलफनामा पेश कर शुक्रवार को हाईकोर्ट में दी गई। हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार के इस आदेश पर रोक लगा दी थी। इस मामले में अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी।
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न्यायमूर्ति नवीन चावला के समक्ष हलफनामा पेश कर दिल्ली सरकार ने कहा कि कोविड-19 के मरीजों के लिए आईसीयू बेड सुरक्षित रखने का नीतिगत फैसला एक अस्थायी उपाय के तौर पर लिया गया था। इसका मकसद राष्ट्रीय राजधानी में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों में कमी लाना था।
दिल्ली सरकार ने उसके आदेश के खिलाफ 13 सितंबर को दायर की गई याचिका का विरोध किया। सरकार ने इस आदेश के तहत 50 या इससे अधिक बिस्तरों वाले सभी निजी अस्पतालों को अपने कुल आईसीयू बिस्तरों का 80 प्रतिशत कोविड-19 के मरीजों के लिए सुरक्षित (रिजर्व) रखने के लिए कहा था। हालांकि 22 सिंतबर को हाईकोर्ट की एकल पीठ ने आदेश पर रोक लगा दी थी।
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कोर्ट के समक्ष दिल्ली सरकार ने कहा कि सरकार का फैसला दिल्ली के नागरिकों के मूल अधिकारों का किसी तरह हनन नहीं करता। सरकार के आदेश के खिलाफ एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स की ओर से दायर याचिका को पूरी तरह से गलत और बेबुनियाद है। पीठ ने याचिकाकर्ता एसोसिएशन को हलफनामे पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है।
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