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Ramayana: रामायण रिसर्च काउंसिल देशभर में जानकी-कथा से फैलाएगी सीताजी के आदर्श, उत्तराखंड से होगी शुरुआत

Mon, 11 May 2026 06:16 PM IST
विकास कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली

सार

रामायण रिसर्च काउंसिल वर्ष 2020 से मां सीताजी के प्राकट्य क्षेत्र सीतामढ़ी को शक्ति-क्षेत्र के रूप में विकसित करने पर कार्य कर रही है। गृह मंत्री अमित शाह ने 9 मार्च 2025 को सीतामढ़ी में भव्य मंदिर निर्माण की घोषणा कर आधारशिला रखी। 
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रामायण - फोटो : X
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विस्तार
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रामायण रिसर्च काउंसिल जानकी-कथा के माध्यम से मां सीताजी के प्रेरणादायी जीवन-आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाएगी। सांसद अजय भट्ट के नेतृत्व में देशभर में श्रीजानकी-कथा का आयोजन किया जाएगा। पहली कथा आगामी 16 मई को उत्तराखंड के रामनगर स्थित सीताबनी में होगी, जिसे 12 वर्षीय बाल-व्यास वैदेहीनंदन वेदांतजी प्रस्तुत करेंगे।

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कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में इसकी घोषणा की गई। काउंसिल के महासचिव कुमार सुशांत ने बताया कि इन कथाओं का उद्देश्य नारी-शक्ति में आत्मनिर्भरता का बोध कराना और उन्हें सीता-तत्त्व को समझने में मदद करना है। भट्ट ने कहा, "मां सीताजी के प्रेरणादायी जीवन से हर एक नारी को सीख लेने की आवश्यकता है।" उन्होंने बताया कि जानकी-कथा से नारी-शक्ति में आत्मनिर्भरता का बोध आएगा। सांसद भट्ट ने मां सीताजी के कार्यों को बल देने और जानकी कथा के प्रसार के लिए शीघ्र ही सीता सखी समिति के गठन की भी जानकारी दी। यह समिति देशभर की महिलाओं को जोड़ेगी। काउंसिल का संकल्प है कि यह कथा भारत के हर राज्य, जिले और गांव तक पहुंचे।

सीतामढ़ी को शक्ति-क्षेत्र के रूप में विकसित करने का प्रयास
रामायण रिसर्च काउंसिल वर्ष 2020 से मां सीताजी के प्राकट्य क्षेत्र सीतामढ़ी को शक्ति-क्षेत्र के रूप में विकसित करने पर कार्य कर रही है। गृह मंत्री अमित शाह ने 9 मार्च 2025 को सीतामढ़ी में भव्य मंदिर निर्माण की घोषणा कर आधारशिला रखी। महामंडलेश्वर स्वामी चित्प्रकाशानंद गिरि ने कहा, "काउंसिल का उद्देश्य केवल मंदिर निर्माण नहीं, बल्कि मां जानकीजी के जीवन-आदर्शों का विश्वभर में प्रसार करना है।" बिहार सरकार ने काउंसिल को सीतामढ़ी में श्रीरामजानकी मठ पर लगभग 12 एकड़ भूमि आवंटित की है। मठ के जीर्णोद्धार हेतु 25 अप्रैल 2026 को शिलापूजन कार्यक्रम संपन्न हुआ।
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काउंसिल की अन्य पहलें
सांसद भट्ट ने कहा कि नारी-शक्ति की समृद्धि से ही सुसंस्कृत समाज व राष्ट्र विकसित होता है। काउंसिल ने 'श्रीरामलला- मन से मंदिर तक' नामक एक ग्रंथ भी तैयार किया है, जो अयोध्या में श्रीराम मंदिर संघर्ष पर आधारित है। काउंसिल संस्कृत भाषा के शिक्षण-प्रशिक्षण पर कार्य करती है और 'रामायण वार्ता' नामक पत्रिका का प्रकाशन भी करती है।

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