नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा और लाल किले पर कब्जा कर तिरंगे के अपमान पर दिल्ली की सियासत गरमा गई है। आम आदमी पार्टी, भाजपा और कांग्रेस ने इसके लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार बताया है। आप ने हिंसा के आरोपी दीप सिद्धूू की भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ तस्वीरें जारी करते पूरे वाकये को भाजपा प्रायोजित व आंदोलन को बदनाम करने की साजिश करार दिया। उधर, भाजपा का कहना है कि लाल किले पर आप कार्यकर्ताओं ने हुड़दंग किया। कांग्रेस का कहना है कि हिंसा दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस की साझी नाकामी है। ट्रैक्टर रैली को जान-बूझकर अनियंत्रित होने दिया।
लाल किले पर किसानों के भड़काने के आरोपी दीप सिद्धू की भाजपा नेताओं के साथ वाली तस्वीरें जारी कर आप ने इस पूरे हंगामे को भाजपा प्रायोजित करार दिया है। आप विधायक राघव चड्ढा का आरोप है कि गणतंत्र दिवस पर पूरे देश ने देखा कि किस तरह केंद्रीय एजेंसियों और भाजपा के करीबी दीप सिंधु ने किसानों की रैली में घुसपैठ करके हिंसा भड़काई।
पार्टी कार्यालय मीडिया से वार्ता में राघव चड्ढा ने कहा कि दिल्ली में मंगलवार की घटना दुर्भाग्यपूर्ण थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके पीछे भाजपा, आरएसएस और केंद्रीय एजेंसियों का हाथ था। यह बड़ी साजिश थी, जिसे किसानों के आंदोलन को कमजोर करने और उन्हें बदनाम करने के लिए रचा गया। चड्ढा ने मांग की कि पुलिस दीप सिद्धू को गिरफ्तार करे और बेवजह एफआईआर दर्ज कर बेकसूर किसानों को परेशान न करे।
पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह को भाजपा का एजेंट करार देते हुए राघव चड्ढा ने कहा कि वे भाजपा को बचाने और आप को फंसाने के काम में लगे हैं। उन्होंने सवाल किया कि अब तक भाजपा की एजेंसियों ने दीप सिद्धू को गिरफ्तार क्यों नहीं किया। उन्होंने साफ किया कि कांग्रेस मंगलवार को लाल किले पर मौजूद अमरीक सिंह नामक जिस व्यक्ति के आप कार्यकर्ता होने का आरोप लगा रही है, उसका पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है। वह भाजपा और अकाली दल से जुड़ा हुआ है। उन्होंने दीप सिद्धू की भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ खींची गई तस्वीरें भी सार्वजनिक कीं।
उधर, दिल्ली में हुए हुड़दंग के लिए भाजपा ने सत्ताधारी आप को निशाने पर लिया है। पार्टी का कहना है कि दिल्ली में हुई हिंसा में आप कार्यकर्ताओं का सीधा हाथ है। पार्टी के मुताबिक, आप कार्यकर्ता लाल किले में तिरंगे को अपमानित करने से लेकर सड़कों पर हुड़दंग तक में शामिल थे। हिंसा को दिल्ली सरकार के कई मंत्रियों की शह थी।
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष आदेश गुप्ता ने मीडिया से वार्ता में कहा कि सिंघु बॉर्डर पर फ्री वाई-फाई लगाकर और आंदोलन के लिए फंडिग करने वालों के साथ मिलकर केजरीवाल ने इस हिंसा को शह दी है। यह पूरी तरह उजागर हो गया है। उन्होंने कुछ फोटोग्राफ मीडिया से साझा करते हुए कहा कि आप के कार्यकर्ता लाल किले के समीप हुड़दंग में शामिल थे। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस पर जो हुआ, वह बेहद शर्मनाक था। राजपथ पर देश के जवान उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे थे तो दूसरी तरफ लोकतंत्र को शर्मसार करने वाले दृश्य भी देखे गए। दिल्ली को बंधक बनाने वाले कोई और नहीं, बल्कि वही लोग हैं, जो आज दिल्ली की सरकार चला रहे हैं। आप के कार्यकर्ता उपद्रवियों में शामिल होकर उनको हवा दे रहे थे। लाल किले पर हुई शर्मनाक घटना के पीछे केजरीवाल सरकार का हाथ है। मुख्यमंत्री ने 26 जनवरी 2014 को कहा था कि हां, मैं अराजकतावादी हूं और 26 जनवरी की परेड नहीं होने दूंगा।
गुप्ता ने कहा कि आम आदमी पार्टी का नाम ‘अरविंद अराजक पार्टी’ होना चाहिए, क्योंकि इसकी मानसिकता ही अराजकतावादी है। दिल्ली में संवैधानिक व्यवस्था को तार-तार करने के लिए आम आदमी पार्टी की यह सुनियोजित साजिश है। यह पहली बार नहीं है, जब इनकी अराजकतावादी सोच बाहर आई हो। कभी सोमनाथ के रूप में, कभी ताहिर हुसैन के रूप में तो कभी अमानतुल्लाह के रूप में इनकी देशविरोधी सोच बाहर आती रही है।
प्रदेश कांग्रेस ने हिंसा का ठीकरा दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस पर फोड़ा है। प्रदेशाध्यक्ष चौ. अनिल कुमार ने कहा कि किसानों की ट्रैक्टर रैली में युवाओं को दोनों ने मिलकर गुमराह किया। इससे साफ है कि रैली में युवाओं को भड़काने में पुलिस और आप सरकार की मिलीभगत थी। ट्रैक्टर रैली में हिंसा को उन्होंने दुर्भाग्यपूर्ण व अनुचित बताया। साथ ही कहा कि यह बात काबिले-गौर है कि दिल्ली पुलिस किसानों को आईटीओ और लाल किले तक आने पर हालात को नियंत्रित कैसे नहीं कर पाई।
दूसरी ओर, जागो पार्टी ने किसान आंदोलन को कमजोर व बदनाम करने का आरोप शिरोमणि अकाली दल बादल गुट पर लगाया है। पार्टी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके ने मीडिया से बताचीत में कहा कि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के खास लोगों ने लाल किले पर किसान जत्थेबंदियों के फैसले के खिलाफ हुड़दंग किया।
जीके ने कहा कि अकाली दल की आईटी विंग का मोगा जिलाध्यक्ष अमनदीप सिंह खालसा उर्फ अमन गिल लाल किले पर मौजूद था। उसके फेसबुक अकाउंट का हवाला देते हुए जीके ने कहा कि अमन अकाली दल के बड़े नेता विक्रमजीत सिंह मजीठिया का विश्वासपात्र है और यूथ अकाली दल का राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष रहा है। 2019 में सुखबीर बादल ने उसे लोकसभा क्षेत्र फरीदकोट का को-आर्डिनेटर बनाया था। किसान आंदोलन को भटकाने के लिए अमन गिल टीकरी बॉर्डर से संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर पहुंचा। इसके बाद वह साथियों के साथ ऑटो से लाल किला पहुंच गया। ऑटो में बैठते हुए अपना वीडियो भी उसने साझा किया है।
जीके ने कहा कि लाल किले की घटना के बाद सारा आरोप दीप सिद्धू पर लगाया जा रहा है, लेकिन जो वीडियो व तस्वीरें सार्वजनिक हुई हैं, उनसे साफ होता है कि कहीं न कही अकाली दल भी किसान आंदोलन को कमजोर करने की साजिश में शामिल है। उन्होंने कहा कि गाजीपुर बॉर्डर पर ट्रैक्टर चलाने की रिहर्सल करने वाले दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा भी 26 जनवरी को कहीं नजर नहीं आए। उन्हें आंदोलन को गलत दिशा देने की सुपारी मिली हुई थी।
बादल समर्थक मीडिया चैनलों द्वारा लाल किले से किए गए सीधे प्रसारण पर हैरानी जताते हुए जीके ने पूछा कि इन्हें कुछ लोगों के लाल किले पहुंचने की जानकारी कहां से मिली थी। जीके ने दीप सिद्धू और अमन गिल का 48 घंटे का फोन डाटा चेक करने की मांग दिल्ली पुलिस से की है, ताकि पता चले कि सिखों की छवि दंगाई के रूप में पेश करने के पीछे मुख्य गुनहगार कौन है। किसान शांतिपूर्ण परेड कर वापस चले गए थे।