नई दिल्ली। कोराना महामारी से आम लोगों को जागरूक करने के लिए मोबाइल पर चल रही कॉलर-ट्यून से बॉलीवुड महानायक अमिताभ बच्चन की आवाज को हटाने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता राकेश ने दायर की है। अदालत ने मामले की सुनवाई 18 जनवरी तय की है।
याचिका में तर्क दिया गया है कि बच्चन का न तो ‘साफ-सुथरा इतिहास’ है और न ही उन्होंने सामाजिक कार्यों द्वारा राष्ट्र की सेवा की है। इसके अलावा वे स्वयं ही नहीं बल्कि उनका परिवार भी कोरोना से पीड़ित हो चुका है। याची ने दावा किया है कि बच्चन पर जो मामले दर्ज या लंबित हैं उनमें से बहुत सी विशेषताओं के कारण भी वे ऐसी सेवा के लिए उपयुक्त नहीं है जबकि वे इसके लिए एक कीमत वसूलते हैं।
उन्होंने कहा कि इन मामलों में एंकर कंपनी के ई-सिगरेट का समर्थन करने के लिए उसके द्वारा एंटी टोबैको एक्ट के कथित उल्लंघन के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट के समक्ष नेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर टोबैको ईरिडकेशन द्वारा दायर रिट याचिका शामिल हैं। इसके अलावा इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष खेती की जमीन आवंटन की घोषणा को चुनौती देते हुए बच्चन द्वारा दायर याचिका लंबित है।
याचिका में टाइम्स ऑफ इंडिया द्वारा प्रकाशित 2011 के एक लेख का भी हवाला दिया गया है जिसमें 1984 के सिख विरोधी दंगों में एक प्रमुख गवाह के अनुसार बच्चन के खिलाफ कथित रूप से दंगा भड़काने का आरोप है। बच्चन के खिलाफ इस तरह के कुछ अन्य आरोपों का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता राकेश ने बच्चन की आवाज को कोविड -19 कॉलर-ट्यून से हटाने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि कोविड-19 के कई अन्य भी योद्धा हैं जिन्होंने महामारी के दौरान विभिन्न रूपों में देश की सेवा की है। ऐसे में वे लोग बच्चन के रूप में विकल्प हैं। वे निशुल्क ऐसी सेवा देने को तैयार है।