नई दिल्ली। राजधानी में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के पीछे अहम वजह है कि लोगों ने घरों से बाहर निकलना और आपस में मिलना-जुलना शुरू कर दिया है। इनमें काफी लोगों में कोरोना के लक्षण नहीं हैं, जिससे यह जांच नहीं कराते हैं। हालांकि, इनके संपर्क में आने से अन्य लोग संक्रमित होते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना लक्षण वाला एक व्यक्ति दो लोगों को संक्रमित कर सकता है।
राजधानी में एक सप्ताह से रोजाना औसतन 2000 के करीब मामले आ रहे हैं। विशेषज्ञों और सरकार का मानना है कि लोगों की लापरवाही के कारण मामले बढ़ रहे हैं। सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टर जुगल किशोर बताते हैं कि अब लोग संक्रमण से बचाव को लेकर सावधानियां नहीं बरत रहे हैं। लोग बिना मास्क लगाए बाहर आना-जाना कर रहे हैं। शारीरिक दूरी भी नहीं अपना रहे हैं। इनमें कुछ ऐसे भी हैं, जिनमें कोई लक्षण नहीं दिखते। इस वजह से उन्हें पता नहीं चलता कि वह खुद संक्रमित हो चुके हैं और कोविड-19 की बीमारी अपने साथ लेकर घूम रहे हैं। महामारी के बढ़ने का एक अहम कारण यह भी है।
बिना लक्षण वालों की भी होगी पहचान
सभी लोगों की जांच कराने के लिए दिल्ली सरकार जांच क्षमता बढ़ाकर दोगुनी कर रही है। तीन दिन में ही करीब 90 हजार टेस्ट हो चुके हैं। जांच ज्यादा होगी तो बिना लक्षण वाले संक्रमितों की भी समय पर पहचान हो सकेगी और उनसे आगे संक्रमण नहीं फैलेगा।
मोबाइल वैन से होगी जांच
स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि दिल्ली में फिलहाल प्रतिदिन 36 हजार टेस्ट हो रहे हैं। दो से तीन दिन में यह आंकड़ा 40 हजार हो जाएगा। जांच बढ़ाने की कड़ी में दिल्ली की सभी निर्माण साइटों पर मोबाइल वैन से जांच होगी। इसके अलावा 207 डिस्पेंसरी और 38 अस्पताल, सर्वोच्च न्यायालय, दिल्ली उच्च न्यायालय, पटियाला हाउस कोर्ट, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भी जांच की जा रही है। इसके अलावा मध्य दिल्ली में केंद्रीय कार्यालयों, संसद भवन में कैंप लगाकर भी जांच कराई जाएगी।