पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की बढ़ी हुई दरें अब दिल्ली-एनसीआर के नौकरीपेशा लोगों को परेशान करने लगी हैं। कोरोना काल से पहले लोकल ट्रेनों की भरमार होने से सफर आसान रहता था और यात्रा किराया भी सस्ता था, लेकिन इन दिनों ट्रैफिक ब्लॉक की वजह से कई लोकल ट्रेनें पटरी पर नहीं हैं।
लिहाजा, दैनिक यात्रियों का जो सफर पहले 10 से 35 रुपये में तय हो जाता था, ऑटो-टैक्सी से अब उन्हें 200 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। गाजियाबाद और फरीदाबाद समेत दिल्ली के नजदीकी शहरों में रहने वालों को ज्यादा परेशानी है, क्योंकि काम दिल्ली में करते हैं और रिहायश बाहरी शहरों में है। यात्रियों की समस्याओं को समेटती अमर उजाला संवाददाता नवनीत शरण की खास रिपोर्ट...
कोविड के बाद लोकल ट्रेनों की संख्या घटी
सार्वजनिक परिवहन के दूसरे माध्यमों की तुलना में ट्रेन की सवारी आज भी काफी सस्ती है। एनसीआर से बड़ी संख्या में कामकाजी लोग ट्रेन से यात्रा करते हैं, लेकिन इन दिनों उत्तर रेलवे की 85 प्रतिशत और नार्थ-सेंट्रल जोन की करीब 70 प्रतिशत लोकल ट्रेन ही चल रही हैं। वहीं, इस वक्त अलीगढ़-दिल्ली-अलीगढ़ के बीच सफर करने वालों को भी परेशानी है। इस रूट पर निर्माण कार्य की वजह से 15-20 प्रतिशत ट्रेनें विभिन्न दिशाओं की निरस्त रहती हैं। इससे दिल्ली पहुंचने वाले लोगों को दूसरे विकल्प तलाशने पड़ रहे हैं। सार्वजनिक परिवहन का सहारा लेने के कारण उन्हें जेब ढीली करनी पड़ रही है।
सीजन टिकट से तय कर सकते हैं 160 किमी तक की दूरी
सीजन टिकट के लिए रेलवे ने अब तक 150 किमी की दूरी को बढ़ाकर 160 कर दिया है। रेलवे के इस निर्णय से दिल्ली से मुरादाबाद, कुरुक्षेत्र, देवबंद, नरवाना समेत अन्य स्टेशन से आवाजाही करने वाले यात्रियों को विशेष फायदा मिलेगा।
मेट्रो से यात्रा करना मजबूरी
शाम 6:45 बजे के बाद गाजियाबाद के लिए एक भी ट्रेन नहीं है। दिल्ली में काम करने वाले ऐसे बहुत कम लोग होंगे, जिनकी छुट्टी शाम छह बजे होती होगी। आजादपुर, सदर बाजार, सब्जी मंडी समेत सभी जगह की दुकानें रात 8 बजे तक खुली रहती हैं। ऐसे में मेट्रो से यात्रा करना मजबूरी है। एमएसटी पास से गाजियाबाद का सफर महज डेढ़ रुपये में होता है, लेकिन इसके लिए मेट्रो में 50 रुपये और घर तक पहुंचने में अतिरिक्त 10 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। कोविड के दौरान कई पैसेंजर ट्रेन बंद कर दी गईं, जो अभी तक नहीं चलीं। इस वजह से हजारों लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
- सहदेव बहादुर, दैनिक रेल यात्री
एक-एक पैसा बचना मुश्किल
सुबह-शाम गिनी-चुनी ट्रेनें चलती हैं। एमएसटी भी सभी एक्सप्रेस ट्रेन में लागू नहीं है। अब मेट्रो से सफर करना पड़ रहा है। रोजाना मेट्रो में 90 रुपये और बाइक पार्किंग में 20 रुपये, यानी 110 रुपये सफर में खर्च हो रहे हैं, जबकि ट्रेन में 500 रुपये के एमएसटी से तीन महीने सफर कोरोना काल से पहले करते थे। महंगाई के दौर में एक-एक पैसा बचना मुश्किल है। कोविड के बाद ट्रेन मुख्य संसाधन नहीं रहा, क्योंकि एक तो स्पेशल के नाम पर ज्यादा पैसे वसूले जाते हैं और दूसरा कि ट्रेन ही समय पर नहीं मिलती हैं। सार्वजनिक परिवहन ने घर का बजट का बिगाड़ दिया है। केंद्र सरकार इस ओर ध्यान दे।
- योगेश सोलंकी, दैनिक रेल यात्री
दूरी किराया यात्री ट्रेन किराया : स्पेशल मेल/एक्सप्रेस
25 10 30
50 15 30
75 20 43
100 25 49
125 30 58
150 35 64
नोट : दूरी किमी में है और बेसिक किराया रुपये में है।
एमएसटी से सफर करना बेहद सस्ता
लोकल ट्रेन से यात्रा करना बेहद ही सस्ता है। 25 किलोमीटर का सफर महज 10 रुपये में किया जा सकता है। अगर मंथली सीजन पास 150-450 रुपये में बनवा लेते हैं तो यात्रा और भी सस्ती हो जाती है। एनसीआर में टैक्सी या ऑटो का सहारा लेते हैं तो इसके लिए 150 रुपये से अधिक चुकाना पड़ता है, यानी एक दिन का यह किराया अगर एमएसटी पास लेकर करते हैं तो पूरे महीने में इसी रकम में सफर कर सकते हैं।