कोरोना टीकाकरण के दूसरे दिन देश के सबसे बड़े चिकित्सीय संस्थान का प्रदर्शन काफी खराब देखने को मिला है। सोमवार को दिल्ली एम्स में केवल आठ कर्मचारियों ने ही कोरोना का टीका लगवाया है। इन कर्मचारियों में भी सुरक्षा गार्ड और चतुर्थ श्रेणी वाले अधिकत्तर हैं।
18 जनवरी को देश के 25 राज्यों में टीकाकरण हुआ है लेकिन बिस्तरों के लिहाज से अस्पताल की तुलना करें तो दिल्ली एम्स एकमात्र ऐसा संस्थान है जहां पूरे देश में सबसे कम स्वास्थ्य कर्मचारियों को टीका लगा है। जानकारी के अनुसार दिल्ली एम्स में आठ और सफदरजंग अस्पताल में 20 कर्मचारियों को कोवैक्सीन की डोज दी गई है।
दक्षिणी दिल्ली जिला प्रशासन के अनुसार एम्स और सफदरजंग अस्पताल में सोमवार को 200 स्वास्थ्य कर्मचारियों को कोवैक्सीन टीका की डोज देनी थी लेकिन दोनों संस्थानों को मिलाकर 28 कर्मचारी ही डोज ले सके। दिल्ली में केंद्र सरकार के छह अस्पताल हैं और सभी जगह भारत बायोटेक द्वारा निर्मित कोवैक्सीन टीका दिया जा रहा है। इन अस्पतालों में 595 स्वास्थ्य कर्मचारियों को टीका लगना था लेकिन 50 फीसदी से कम यानि केवल 239 स्वास्थ्य कर्मचारी ही इसके लिए आगे आए।
हालांकि गौर करने वाली बात है कि 239 में से एक भी टीका दुष्प्रभाव का मामला सामने नहीं आया है। बावजूद इसके टीका को लेकर स्वास्थ्य कर्मचारी आगे आने से कतरा रहे हैं। नई दिल्ली जिला प्रशासन के अनुसार आरएमएल अस्पताल और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में 195 स्वास्थ्य कर्मचारियों को टीका लगाने का लक्ष्य था जबकि शाम तक 146 कर्मचारियों को ही टीका लग सका। ठीक इसी तरह रोहिणी ईएसआई अस्पताल में 100 में से 37 और दूसरे ईएसआई अस्पताल में 100 में से केवल 28 लोगों ने ही टीका लगवाया है।
दिल्ली एम्स में टीकाकरण की सुस्त चाल को लेकर प्रबंधन में भी इस समय खलबली मची हुई है। चूंकि हर किसी को जबरन टीका नहीं दिया जा सकता है। इसलिए प्रबंधन के अधिकारी स्वास्थ्य कर्मचारियों की काउंसलिंग करने में नाकामयाब साबित हो रहे हैं।
जानकारी यहां तक है कि एम्स के ही कई विभागाध्यक्ष टीकाकरण को लेकर आगे नहीं आ रहे हैं। कोवैक्सीन को लेकर एम्स में अब तक तीन परीक्षण हो चुके हैं लेकिन केवल गिनती के डॉक्टर ही इस परीक्षण में शामिल हुए। कोवैक्सीन का एम्स में ही परीक्षण होने के बाद भी यहां के कर्मचारियों को स्वदेशी टीका पर भरोसा नहीं हो पा रहा है।
बहरहाल इस मामले में एम्स प्रबंधन ने भी चुप्पी साध ली है। सोमवार को एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया और प्रवक्ता डॉ. आरती विज से संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन टीकाकरण कम होने के पीछे के मुख्य कारण सामने नहीं आ सके।