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दिल्ली हाईकोर्ट: इफ्को के कर्मचारियों को प्लॉट देने के नाम पर फर्जीवाड़ा करने वाले अधिकारी को नहीं मिली जमानत

Sun, 10 Apr 2022 05:13 AM IST
Jeet Kumar विजय सिंघल, नई दिल्ली।

सार

अदालत ने कहा कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप गंभीर और आर्थिक अपराध की श्रेणी में हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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हाईकोर्ट ने भारतीय किसान उर्वरक सहकारी लिमिटेड (इफ्को) के 114 कर्मचारियों को प्लाट देने के नाम पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के मामले में मेसर्स प्रगति भूमि और आवास निगम के अधिकारी मनोहर सीताराम पाटिल को जमानत देने से इनकार कर दिया है।

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अदालत ने कहा कि ऐसे सैकड़ों निर्दोष खरीदारों को धोखा दिया है, जिन्होंने अपना घर पाने की उम्मीद में उनकी परियोजना में पैसा निवेश किया था। अदालत ने कहा कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप गंभीर और आर्थिक अपराध की श्रेणी में हैं।

न्यायमूर्ति प्रतीक जालान ने आरोपी मनोहर सीताराम पाटिल की जमानत अर्जी खारिज करते हुए कहा है कि आवेदक वर्तमान प्राथमिकी में जमानत का हकदार नहीं है। वह 27 मई 2015 को दिए गए अंतरिम जमानत के आदेश के संदर्भ में आत्मसमर्पण करने में विफल रहा है।
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याची दो साल से अधिक की अवधि के लिए अंतरिम जमानत पर बाहर रहा। उसने अदालत के समक्ष निवेशकों के मामले का हल निकालने के लिए दिए गए आश्वासन का पालन नहीं किया है। उसे  8 मई 2018 को भगोड़ा घोषित किया गया।  वर्तमान मामले में 17 सितंबर 2021  को पुन: गिरफ्तार किया गया था।

अदालत ने कहा निसंदेह यही कारण है कि मुकदमे में भी काफी  देरी हो रही है। इन परिस्थितियों में आवेदक का आचरण इस तर्क का समर्थन नहीं करता है कि वह भागेगा नहीं और जब भी ट्रायल की कोर्ट को जरूरत होगी तब वह उपलब्ध होगा।  

अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा है कि  ऐसे सैकड़ों निर्दोष घर खरीदारों के साथ  धोखा हुआ है। जिन्होंने अपना घर पाने की उम्मीद में अपना पैसा निवेश किया।

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