न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने एम्स को निर्देश दिया वे किसी के खिलाफ कोई तत्काल कार्रवाई न करें। चीजों को शांत होने दें। शिकायतों के निपटारे के लिए एक बोर्ड का गठन करें, आपको संतुलन बनाना होगा। सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि नर्सेज यूनियन के अध्यक्ष को पहले ही निलंबित किया जा चुका है और दो को चार्जशीट किया गया है।
पीठ ने एम्स की ओर से पेश वकील से कहा कि अगर संस्थान को कुछ भी गलत लगता है तो 'इसे कानून के मुताबिक लें। आप उनमें से किसी के खिलाफ तत्काल कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करेंगे।' अदालत ने कहा कि यूनियन पदाधिकारी यह भी वचन देंगे कि संस्थान के कामकाज में बाधा नहीं आएगी।
नर्स यूनियन की ओर से पेश अधिवक्ता अभिजीत ने कहा कि यूनियन ने पहले ही हड़ताल वापस लेने का फैसला कर लिया है। हम 24 घंटे के भीतर एक अंडरटेकिंग देंगे। अधिवक्ता स्वैन ने कहा कि वीडियो देखने के बाद यूनियन के 37 सदस्यों और 5 पदाधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। एम्स की ओर से पेश अधिवक्ता सत्य रंजन स्वैन ने कहा कि डॉक्टरों को मुख्य ऑपरेशन थियेटर (ओटी) के अंदर जाने की अनुमति नहीं है।
पीठ ने उनसे पूछा कि क्या वे आगे की कार्रवाई करना चाहते हैं या इस मुद्दे को समाप्त करना चाहते हैं। पीठ ने कहा एक बोर्ड का गठन करें और कर्मचारियों की शिकायतों को सुनें। कर्मचारियों से अच्छे व्यवहार का वचन देने और दैनिक कार्यों में हस्तक्षेप न करने के लिए कहें। पीठ ने अधिवक्ता स्वैन को निर्देश दिया कि वह निदेशक एम्स से बात करें और निर्देश लें कि अनुशासन कैसे बनाए रखा जाए।
उच्च न्यायालय ने मंगलवार को एम्स नर्स यूनियन को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि हड़ताल पर रहने वाली नर्सों सहित कर्मचारी तुरंत ड्यूटी पर शामिल हों। एम्स ने मंगलवार को दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख कर नर्स यूनियन और एम्स के किसी भी कर्मचारी को हड़ताल करने या याचिकाकर्ता के संस्थान और अस्पताल के सामान्य कामकाज को बाधित करने से रोकने के लिए निर्देश देने की मांग की।