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नर्सरी दाखिला : अभिभावकों पर पड़ा दो बच्चों का भार, इसके बाद पैसों की मार

Sat, 19 Feb 2022 02:38 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

जुड़वां बच्चों में केवल एक को ही मिल रहा है प्रवेश। डोनेशन मांगने का खेल शुरू, लिस्ट में नाम आने पर भी मांगे जा रहे रुपये।
 
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नर्सरी दाखिला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजधानी के निजी स्कूलों में नर्सरी की 75 फीसदी ओपन सीटों (सामान्य) पर दाखिला प्रक्रिया चल रही है, लेकिन जुड़वां बच्चों के लिए दाखिले के अलग-अलग नियम भारी पड़ रहे हैं। चार फरवरी को दाखिले की पहली सूची जारी होने के बाद जुड़वां बच्चों के अभिभावकों के सामने परेशानी खड़ी हो गई है। कई स्कूलों नेे दोनों बच्चों का दाखिला ले लिया है तो कहीं किसी एक बच्चे का दाखिला ही लिया जा रहा है। अब अभिभावकों की परेशानी यह है कि दो बच्चों को अलग-अलग स्कूलों में कैसे दाखिला दिलाएं?

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जुड़वां बच्चों के लिए दाखिला पॉलिसी नहीं होनेे के कारण यह परेशानी सामने आई है। वहीं, स्कूलों ने डोनेेशन मांगने का खेल भी शुरू कर दिया है। अभिभावकों का कहना है कि सूची में नाम आने पर भी स्कूल डोनेेशन की मांग कर रहे हैं। एडमिशन नर्सरी डॉट कॉम की फोरम पर शिकायत करने वाले अभिभावक के अनुसार उत्तरी दिल्ली के एक स्कूल के आवेदन फॉर्म में जुड़वां बच्चे की जानकारी मांगी गई थी। तभी उन्होंने वहा आवेदन किया। दाखिले के लिए लॉटरी होनेे पर एक बच्चे का चयन हो गया, लेकिन अब तक दूसरे बच्चे के लिए स्कूल की तरफ से उत्तर नहीं मिला है।

एक अन्य अभिभावक के अनुसार नामी स्कूल मेें एक बेटी पहले से पढ़ रही है। अब दो जुड़वां बच्चों में से उस स्कूल में बेटी का दाखिला हो गया, लेकिन बेटे का नहीं हो पाया है। अब उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि कैसेे अलग-अलग स्कूल में दाखिला दिलाएं। वह चाहते हैैं कि जब एक बच्चे का दाखिला हो गया है तो दूसरे का दाखिला भी उसी स्कूल में हो। अभिभावकों की शिकायत डोनेशन मांगने को लेकर भी है। मालूम हो कि नर्सरी दाखिले की दूसरी सूची सोमवार (21 फरवरी) को जारी होनी है।
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शिक्षा निदेशालय को बनानी चाहिए नीति
एडमिशन नर्सरी डॉट कॉम प्रमुख सुमित वोहरा कहते हैं कि कुछ ही निजी स्कूलों में जुड़वां बच्चों को एक ही स्कूल में दाखिला मिलता है। निजी स्कूलों में नर्सरी दाखिले के लिए कोई नीति नहीं है। शिक्षा निदेशालय को जुड़वां बच्चों को लेकर नीति बनानी चाहिए, जिससे कि अभिभावकों को परेशान न होना पड़े। वहीं, सूची में नाम आने के बाद भी स्कूल पैसे मांग रहे हैं। शिक्षा निदेशालय ने किसी स्कूल पर कोई कार्रवाई नहीं की है।

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