ट्रेनों को कीटाणुरहित रखने के लिए उत्तर रेलवे के दिल्ली मंडल ने यूवीसी रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया है। इस तकनीक की खूबी है कि ट्रेन के कोच को बगैर कर्मियों के अल्ट्रा वॉयलेट लाइट के जरिये कोरोना वायरस से पूरी मुक्त करना संभव है। कोच में किसी भी सतह को छुए बगैर रोबोटिक तकनीक से कीटाणु, रोगाणु और विषाणु मुक्त किया जा सकता है। वायरस को नष्ट करने में सक्षम में यूवीसी तकनीक का सबसे पहले लखनऊ शताब्दी स्पेशल में जुलाई में इस्तेमाल किया ।
कोरोना महामारी के दौरान उत्तर रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा और आरामदायक सफर को प्राथमिकता देते हुए कठिन परिश्रम और समर्पण के बाद इस तकनीक को लागू किया। उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक आशुतोष गंगल ने बताया कि यात्रियों की सुरक्ष्रा को प्राथमिकता देते हुए उत्तर रेलवे ने ट्रेन की कोच को कीटाणुरहित करने का निर्णय लिया।
सभी विकल्पों पर मंथन और परीक्षण के बाद क्रांतिकारी यूवीसी तकनीक को उन जगहों पर भी तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है, जहां दूसरे माध्यमों से पहुंचना मुश्किल है। खास बात यह है कि इस प्रक्रिया में किसी भी कर्मी की भागीदारी नहीं होती है। यूवीसी तकनीक पूर्ण तौर पर सुरक्षित इस्तेमाल के लिए माकूल है और इस उपकरण का इस्तेमाल वाशिंग लाइन में भी सुगमता से किया जा सकता है। यात्रियों ने भी रेलवे की इस कोशिश की सराहना करते हुए कोरोना काल में सफर के दौरान सुरक्षा के अनुभव साझा किए हैं।
वायरस के न्यूक्लियस को कर देता है नष्ट, प्रसार रोकने में सक्षम
यूवीसी तकनीक के तहत उपकरण में लाइट और रोबोटिक उपकरण का उपयोग किया गया है। सुरक्ष्रा के लिहाज से इस उपकरण को वायरलेस रिमोट कंट्रेल से संचालित किया जाता है। इसकी खूबी यह है कि कोरोना वायरस के नाभिक (न्यूक्लियस) को भी नष्ट करने में सक्षम है। हरित प्रयास के उपयोग से कोरोना वायरस सहित किसी भी तरह के कीटाणु, विषाणु या जीवाणु को नष्ट किया जा सकता है।
सरकार ने प्रयोगशाला में परीक्षण के बाद प्रमाणित किया है। परीक्षण में सामने आया कि यह तकनीक जीवाणु, कीटाणु और रोगाणुओं को 99.99 फीसदी तक मारने में सक्षम है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद, सीएसआईओ और तनुवास अध्ययन केंद्र और केंद्र सरकार ने इस तकनीक को अनुमोदित किया है। एयर इंडिया एक्सप्रेस केबिन को कीटाणुरहित करने के लिए पहले से ही इस तकनीक का इस्तेमाल कर रही है जबकि पिछले करीब 20 वर्ष से अस्पतालों में भी इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।