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ओबीई : अब तीस मिनट में ही जमा करनी होगी उत्तरपुस्तिका, सेमेस्टर परीक्षा सात जून से 

Mon, 24 May 2021 05:26 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

  • इससे पहले एक घंटे का समय मिलता था
  • अंतिम वर्ष की सेमेस्टर परीक्षा सात जून से 
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demo pic... - फोटो : Pexels
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विस्तार
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दिल्ली विश्वविद्यालय में आगामी सात जून से अंतिम वर्ष की सेमेस्टर परीक्षा ओबीई (ओपन बुक एग्जाम) शुरू होने जा रहे हैं। इस बार ओबीई में परीक्षा का तय समय बीत जाने के बाद देरी से उत्तरपुस्तिका जमा कराने के लिए कम समय मिलेगा। अब तक मिलने वाली एक घंटे की समय सीमा को घटाकर तीस मिनट का कर दिया गया है। इस तरह से देरी से उत्तरपुस्तिका जमा कराने के लिए विद्यार्थियों को केवल आधा घंटा ही मिलेगा।

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इसके पीछे प्रशासन का तर्क है कि अब विद्यार्थी समय से उत्तरपुस्तिका जमा करा देते हैं। दरअसल विद्यार्थियों को इंटरनेट कनेक्टिविटी व अन्य कोई तकनीकी दिक्कत होने पर उत्तरपुस्तिका जमा कराने के लिए अतिरिक्त समय दिया जाता है। परीक्षा के लिए लिए विद्यार्थियों को चार घंटे का समय मिलता है जिसमें तीन घंटे उत्तर लिखने के लिए व एक घंटा प्रश्न पत्र डाउनलोड करने, उत्तरपुस्तिका पीडीएफ फॉर्म में स्कैन करने और उसे पोर्टल पर अपलोड करने के लिए दिया जाता है। 

यह समय सीमा बीत जाने के बाद उन्हें तकनीकी खराबी होने पर विद्यार्थियों को अपनी उत्तरपुस्तिका कॉलेज-विभाग केनोडल अधिकारी को ईमेल करनी होती है। इसके लिए विद्यार्थियों को अब तक एक घंटा मिलता था लेकिन अब उसे महज 30 मिनट ही मिलेंगे। डीयू परीक्षा शाखा डीन प्रो सी.एस रावत ने कहा कि अब तक 60 मिनट देते थे अब इसे तीस मिनट किया गया है। उन्होंने कहा कि बीते ओबीई के दौरान विश्लेषण में पाया कि विद्यार्थी समय से उत्तरपुस्तिका जमा करा देते हैं। इस कारण से इस समय सीमा को कम किया गया है। 
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उल्लेखनीय है कि देरी से उत्तरपुस्तिका ईमेल करने पर विद्यार्थियों को दस्तावेजी प्रमाणपत्र भी देना होता है। देरी से उत्तरपुस्तिका भेजने वाले मामलों की जांच एक रिव्यू कमेटी करती है। ऐसे विद्यार्थियों के रिजल्ट में देरी भी हो सकती है। वहीं डीयू प्रशासन पहले ही ओबीई को लेकर दिशा-निर्देश जारी कर चुका है। दिशा-निर्देशों के अनुसार ओबीई रिमोट मोड(घर बैठ कर) व फिजिक्ल मोड(कॉलेज आकर) में होगा। जिन छात्रों ने रिमोट मोड का विकल्प लिया होगा उन्हें फिजिकल मोड में परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं होगी। 

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विश्वविद्यालयों में 40 फीसदी पाठ्यक्रम ऑनलाइन पढ़ाने का विरोध

विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में पाठ्यक्रम का चालीस फीसदी हिस्सा ऑनलाइन तरीके से पढ़ाने का विरोध शुरु हो गया है। दरअसल यूजीसी ने विश्वविद्यालयों में 60 फीसदी पढ़ाई ऑफलाइन व 40 फीसदी पढ़ाई ऑनलाइन कराने की तैयारी की है। इस तरह से एक ही कोर्स को दो माध्यम से पढना होगा। इस संबंध में यूजीसी की ओर से सभी हितधारकों से सुझाव मांगे गए हैं। इस पर डीयू शिक्षकों ने विरोध शुरु कर दिया है। डीयू के शिक्षक संगठन एएडी ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि अधिकांश छात्रों के पास बुनियादी ढांचे और उपकरणों की कमी है।

एएडी सदस्य डॉ राजेश झा ने कहा कि हम यूजीसी की इस योजना का विरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांटे व उपकरणों की कमी के कारण ऑनलाइन कक्षाएं संभव नहीं हैं। डीयू में ही एससी, एसटी, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस, पीडब्ल्यूडी, पूर्वोत्तर राज्यों, जम्मू कश्मीर जैसे दूरस्थ क्षेत्रों से तीन चौथाई छात्र पढने आते हैं। जिनके पास इंटरनेट की सुविधा नहीं है। स्मार्टफोन होने का मतलब डिजिटल माध्यम तक पहुंच होना नहीं है। ऑनलाइन कक्षाएं नियमित करने से शिक्षण की गुणवत्ता के साथ-साथ शिक्षकों के वर्कलोड में भी कमी आएगी । 

डॉ राजेश ने कहा कि कहा कि ऐसा करके निजीकरण करने का प्रयास किया जा रहा है। इससे कार्यभार में भारी कमी आएगी। इससे तदर्थ व अस्थायी शिक्षकों को हटाया जाएगा। जबकि हम लगातार तदर्थ और अस्थायी शिक्षकों के समायोजन की मांग करते आ रहे हैं। 
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