विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में पाठ्यक्रम का चालीस फीसदी हिस्सा ऑनलाइन तरीके से पढ़ाने का विरोध शुरु हो गया है। दरअसल यूजीसी ने विश्वविद्यालयों में 60 फीसदी पढ़ाई ऑफलाइन व 40 फीसदी पढ़ाई ऑनलाइन कराने की तैयारी की है। इस तरह से एक ही कोर्स को दो माध्यम से पढना होगा। इस संबंध में यूजीसी की ओर से सभी हितधारकों से सुझाव मांगे गए हैं। इस पर डीयू शिक्षकों ने विरोध शुरु कर दिया है। डीयू के शिक्षक संगठन एएडी ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि अधिकांश छात्रों के पास बुनियादी ढांचे और उपकरणों की कमी है।
एएडी सदस्य डॉ राजेश झा ने कहा कि हम यूजीसी की इस योजना का विरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांटे व उपकरणों की कमी के कारण ऑनलाइन कक्षाएं संभव नहीं हैं। डीयू में ही एससी, एसटी, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस, पीडब्ल्यूडी, पूर्वोत्तर राज्यों, जम्मू कश्मीर जैसे दूरस्थ क्षेत्रों से तीन चौथाई छात्र पढने आते हैं। जिनके पास इंटरनेट की सुविधा नहीं है। स्मार्टफोन होने का मतलब डिजिटल माध्यम तक पहुंच होना नहीं है। ऑनलाइन कक्षाएं नियमित करने से शिक्षण की गुणवत्ता के साथ-साथ शिक्षकों के वर्कलोड में भी कमी आएगी ।
डॉ राजेश ने कहा कि कहा कि ऐसा करके निजीकरण करने का प्रयास किया जा रहा है। इससे कार्यभार में भारी कमी आएगी। इससे तदर्थ व अस्थायी शिक्षकों को हटाया जाएगा। जबकि हम लगातार तदर्थ और अस्थायी शिक्षकों के समायोजन की मांग करते आ रहे हैं।