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अस्थाना की नियुक्ति में अनियमितता, अवैधता नहीं : हाईकोर्ट

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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने कहा कि गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी राकेश अस्थाना की दिल्ली पुलिस कमिश्नर के तौर पर नियुक्ति में कोई अनियमितता, अवैधता या दुर्बलता नहीं है। इतना ही नहीं अदालत ने याची सद्रे आलम द्वारा कापी पेस्ट के जरिये याचिका दायर करने पर भी कड़ी नाराजगी जताते हुए उन्हें भविष्य में ऐसा आचरण न करने की चेतावनी दी।
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मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने कहा कि 1984 बैच के आईपीएस अधिकारी की नियुक्ति के लिए अपनाई गई प्रक्रिया का पालन लगभग एक दशक से अधिक के लिए किया जा रहा था और राष्ट्रीय राजधानी की अलग जरूरतों के मद्देनजर ऐसे मामलों में अधिकारियों की नियुक्ति के लिए स्वतंत्रता दी जानी चाहिए।
अस्थाना की नियुक्ति को अधिवक्ता सद्रे आलम ने चुनौती दी थी। वहीं एनजीओ सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (सीपीआईएल) ने एडवोकेट प्रशांत भूषण के माध्यम से हस्तक्षेप किया था। पीठ ने दोनों के तर्कों को खारिज करते हुए नियुक्ति को सही ठहराया।
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पीठ ने अपने 77 पृष्ठों के फैसले में कहा दिल्ली में आठ तत्कालीन पुलिस आयुक्तों की नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा अस्थाना की नियुक्ति से पहले 2006 से की गई है। इसी प्रक्रिया का पालन किया गया है जैसा कि अस्थाना की नियुक्ति के लिए किया गया है। पीठ ने कहा उक्त नियुक्तियों पर कभी कोई आपत्ति नहीं आई है न तो यूपीएससी या किसी अन्य पक्ष द्वारा।
सीमा सुरक्षा बल के महानिदेशक के रूप में सेवारत अस्थाना को 31 जुलाई को उनकी सेवानिवृत्ति से चार दिन पहले 27 जुलाई को दिल्ली पुलिस आयुक्त नियुक्त किया गया था।
याचिकाकर्ता वकील सद्रे आलम ने अस्थाना को दिल्ली पुलिस आयुक्त नियुक्त करने के गृह मंत्रालय के 27 जुलाई के आदेश को रद्द करने की मांग की थी।
पीठ ने कहा दिल्ली ने कानून और व्यवस्था की चुनौतीपूर्ण स्थितियों को देखा है, जिसके अंतरराष्ट्रीय परिणाम हैं। इस पद के लिए एक अनुभवी अधिकारी का चयन करने की आवश्यकता थी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रकाश सिंह मामले में उच्चतम न्यायालय का फैसला दिल्ली के लिए पुलिस आयुक्त की नियुक्ति पर लागू नहीं होता। यह मात्र राज्य के पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति के लिए लागू होता है।
अदालत ने केंद्र सरकार के उस तर्क पर सहमति जताई कि दिल्ली भारत की राजधानी होने के नाते एक अद्वितीय, विशेष और विशिष्ट अधिकारी की आवश्यकता है। दिल्ली ने कई अप्रिय घटनाओं और अत्यंत चुनौतीपूर्ण कानून और व्यवस्था की स्थितियों/दंगों/अपराधों को देखा है, जिनका अंतर्राष्ट्रीय निहितार्थ है।
इसके संबंध में केन्द्र सरकार के परामर्श से अन्य कारकों के अलावा एक बड़े अर्धसैनिक सुरक्षा बल का नेतृत्व करने का विशेष और विविध अनुभव रखने वाले अनुभवी अधिकारी की नियुक्ति की आवश्यकता थी।
अदालत ने कहा कि केंद्र ने उक्त पृष्ठभूमि में उपरोक्त कारकों को ध्यान में रखते हुए अस्थाना की नियुक्ति की है। राष्ट्रीय राजधानी में किसी भी अप्रिय घटना या कानून और व्यवस्था की स्थिति के न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार दूरगामी परिणाम, प्रभाव, दुष्परिणाम और निहितार्थ होंगे।
पीठ ने स्पष्ट किया कि यह जरूरी है कि राजधानी में व्याप्त जटिलताओं को ध्यान में रखते हुए दिल्ली के पुलिस आयुक्त की नियुक्ति के लिए केंद्र सरकार को पूरे अधिकार प्रदान किए जाएं। इतना ही नहीं केंद्र के पास अंतर-संवर्ग प्रतिनियुक्ति प्रदान करने और सेवा प्रदान करने की अनुमति देने के लिए सेवा नियमों में ढील देने की कानूनन शक्ति है।
पीठ ने कहा कि सभी तथ्यों को देखने से स्पष्ट है कि केंद्र सरकार की अस्थाना की नियुक्ति में कोई अनियमितताएं नहीं है और न ही किसी कानून का उल्लंघन किया गया। ऐसे में मामले में अदालत के हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है और वे दायर याचिका खारिज करते हैं।
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