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Delhi : एनजीटी ने नोएडा स्थित रियाल्टार पर लगाया 113.25 करोड़ रुपये का जुर्माना, जानिए क्यों लगी ईडी को फटकार

Wed, 08 Feb 2023 10:18 PM IST
Digvijay Singh एजेंसी, नई दिल्ली

सार

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने कहा कि ईडी ध्यान देना भूल गया कि मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) की रोकथाम का दायरा बढ़ा दिया गया है और इस तरह के अपराध करने से अर्जित राजस्व कानून में परिभाषित अपराध की आय है। 
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एनजीटी - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने पर्यावरण मानदंडों का उल्लंघन करने पर नोएडा स्थित एक रियल एस्टेट कंपनी पर 113.25 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही पाया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से इस मामले में साढ़े नौ साल से अधिक की निष्क्रियता के चलते उल्लंघन को प्रोत्साहन मिला है।एनजीटी ने कहा कि ईडी ध्यान देना भूल गया कि मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) की रोकथाम का दायरा बढ़ा दिया गया है और इस तरह के अपराध करने से अर्जित राजस्व कानून में परिभाषित अपराध की आय है। एनजीटी एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था। याचिका में दावा किया गया है कि उप्पल चड्ढा हाई टेक डेवलपर्स प्रा. लिमिटेड उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद और गौतम बुद्धनगर जिलों के 14 गांवों में अपनी हाई-टेक टाउनशिप में पर्यावरण मानदंडों का उल्लंघन कर रहा है।

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अध्यक्ष एके गोयल की पीठ ने कहा कि परियोजना प्रस्तावक (पीपी) ने कई पर्यावरणीय मानदंडों का उल्लंघन किया। पर्यावरण की बहाली के लिए उपचारात्मक कार्रवाई के लिए प्रस्तावक को पर्यावरणीय मुआवजे का भुगतान करने की आवश्यकता थी। न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल की पीठ ने कुल परियोजना लागत के 0.75 प्रतिशत पर पर्यावरणीय मुआवजे की गणना की। 

 

पीठ ने कहा, पीपी की ओर से 113.25 करोड़ रुपये के पर्यावरणीय मुआवजे का भुगतान किया जाएगा और तीन महीने के भीतर उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) के पास इसे जमा कराना होगा। पीठ ने कहा कि पीपी के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने जैसी दंडात्मक कार्रवाई भी उचित होगी।

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