राजधानी की सड़कों पर मंगलवार को यात्री बसों के इंतजार में परेशान दिखे। क्लस्टर बसों के ड्राइवर-कंडक्टर की हड़ताल और डीटीसी बसों के ब्रेकडाउन व बसों की सर्विसिंग के चलते यात्री दिनभर भटकते दिखे।
बसों की कमी के चलते यात्रियों ने निजी वाहन का इस्तेमाल किया। इसके चलते राजधानी में जाम की स्थिति बनी रही।
दिल्ली में क्लस्टर (नारंगी) बसों के लगभग तीन हजार ड्राइवर और कंडक्टर हड़ताल पर चले गए हैं। हड़ताल के चलते कंझावाला, कुसरनाला, सुनहरी पुला और बीबीएम डिपो की 461 बसें सड़कों पर नहीं उतरीं।
ड्राइवर-कंडक्टरों की मांग है कि उन्हें नई कंपनी अनुबंध पर रखे, लेकिन पुरानी कंपनी के घोटालों के चलते नई कंपनी इन्हें रखने को तैयार नहीं है।
दूसरी तरफ, सुबह और शाम की शिफ्ट के आधार पर लगभग 800 बसें ब्रेकडाउन होकर सड़कों पर खड़ी हो गईं। जबकि सर्विसिंग और ड्राइवर-कंडक्टरों के अचानक छुट्टी लेने के चलते लगभग 600 बसें नहीं चलीं। इससे यात्रियों की परेशानी दोगुनी हो गई।
आईटीओ पर कई यात्रियों ने बताया कि वे अंबेडकर नगर जाने के लिए क्लस्टर बस का एक घंटे से इंतजार कर रहे थे, लेकिन बस नहीं मिली।
परेशानी तब और बढ़ गई, जब नारंगी बसों के साथ ही डीटीसी की भी बसें नहीं मिलीं।
ऐसा ही हाल राजधानी के दूसरे इलाकों का भी रहा। लोगों ने निजी वाहन से ऑफिस जाना ठीक समझा, लेकिन जाम के चलते घंटों सड़कों पर परेशान रहे।
गौरतलब है कि क्लस्टर के चारों डिपो में तैनात 3,000 ड्राइवर और कंडक्टर प्रहरी कंपनी ने अनुबंध पर रखे थे, लेकिन पिछले दिनों दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इस कंपनी के घोटाले का पर्दाफाश किया था।
कंपनी ने कर्मियों से पैसा लेकर फर्जी सर्टिफिकेट दिखाकर ड्राइवरों और कंडक्टरों को नौकरी पर रखा था, जबकि नियमों के तहत उनके पास सार्वजनिक बसों को चलाने के सर्टिफिकेट नहीं थे।
घोटाला सामने आने पर डिम्ट्स ने उक्त कंपनी को ब्लैकलिस्ट करते हुए उसके साथ करार तोड़ दिया था।