नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय में सत्र 2013-14 में लागू होने वाले चार वर्षीय प्रोग्राम में छात्रों को चालीस तक पेपर पढ़ने पढ़ सकते हैं। प्रोग्राम के लिए गठित टास्क फोर्स की बैठकों में इसके ढांचे को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
अगले साल लागू होने वाले इस प्रोग्राम को लेकर गठित टास्क फोर्स की बैठकों का दौर शुरू हो गया है। बैठकों में सदस्य अपने-अपने प्रस्ताव रख रहे हैं। उन पर चर्चाएं हो रही हैं। 61 सदस्यीय इस कमेटी में विभिन्न डीन, विभागाध्यक्ष, प्रिंसिपल, विभिन्न कॉलेजों व विभागों के शिक्षक शामिल किए गए हैं।
टास्क फोर्स को मिले फीडबैक में जो तस्वीर सामने आएगी, उसी आधार पर बदलावों को अंजाम दिए जाने की योजना है। प्रोग्राम में क्या-क्या शामिल किया जा सकता है, इसको लेकर शुक्रवार को हुई बैठक में चर्चा की गई। सदस्यों की ओर से प्रोग्राम में पाठ्यक्रम का ओरल स्ट्रक्चर और फॉर्मल स्ट्रक्चर रखने की बात हुई।
इस प्रोग्राम के अंतर्गत दो रिसर्च पेपर डालने की बात की जा रही है। सदस्यों का मानना है कि कॉलेज स्तर पर रिसर्च पेपर जुड़ने से कॉलेजों में रिसर्चर को रखा जा सकेगा। वहीं, इस प्रोग्राम के अंतर्गत आंतरिक मूल्यांकन को खत्म करने की बात पर भी चर्चा हुई। योजना के तहत चालीस पेपर रखने की बात की जा रही है, जिसमें पहले साल में दस फाउंडेशन कोर्स तो दूसरे साल में चार स्किल बेस्ड कोर्स हो सकते हैं।
गौरतलब है कि समकुलपति विवेक सुनेजा की अध्यक्षता में कुलपति दिनेश सिंह ने चार वर्षीय प्रोग्राम के लिए टास्क फोर्स का गठन किया है।