आखिरी लेक्चर के साथ मोटिवेशनल स्पीकर कैलाश ज्याणी ने दुनिया को अलविदा कह दिया है। आग लगने से कुछ देर पहले बेटे अमित ज्याणी के साथ वे लेक्चर देने पहुंचे थे। परिवार वालों ने दोनों शवों की पहचान कर ली है। कंपनी ने पिता-पुत्र को कर्मचारियों को मोटिवेशनल स्पीच देने के लिए बुलाया था। घटना में दोनों आग की चपेट में आ गए। अधिकारियों ने उनके शवों की पहचान होने की पुष्टि की है।
कैलाश गुरुग्राम के रहने वाले थे। मुंडका स्थित इमारत में जब आग लगी थी, तब वहां कंपनी के कर्मियों के लिए बैठक का आयोजन किया गया था। इसका मकसद कंपनी के उत्पाद की बिक्री और इससे जुड़ी रणनीति पर चर्चा के अलावा कर्मचारियों को बेहतर कार्य के लिए प्रेरित करना था।
कंपनी ने इसके लिए पिता पुत्र को बतौर मोटिवेशनल स्पीकर के तौर पर बुलाया था। घटना के समय दोनों कर्मचारियों को मोटिवेशनल स्पीच दे रहे थे। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, घटना के बाद इनके परिवार वालों ने पुलिस से संपर्क किया और दोनों के गायब होने की जानकारी दी। बाद में परिवार वालों को हादसे में मृत लोगों के शवों को दिखाया गया, जिसमें पहले पिता की पहचान कर ली गई और बाद में पुत्र के शव की भी पहचान कर ली गई।
एफएसएल की दो टीमों ने शुरू की जांच
फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की दो टीमों ने शनिवार को मुंडका में घटनास्थल पर जांच की। एफएसएल के विशेषज्ञों ने मौके से नमूनों की पहचान की और उन्हें इकट्ठा करने में पुलिस की मदद की। इसके बाद इकट्ठा किए गए इन सभी नमूनों को जांच अधिकारी को सौंप दिया गया।
एफएसएल रोहिणी की निदेशक दीपा वर्मा ने बताया कि वरिष्ठ विशेषज्ञों सहित दो टीमों ने नमूने इकट्ठा किए। मौके पर इंसानों के जले हुए अवशेष मिले हैं, इसलिए संभवत: मृतकों की पहचान के लिए फोरेंसिक डीएनए जांच की जाएगी। क्राइम सीन प्रमुख एसके गुप्ता ने बताया कि आग से जलने वाले मामलों में नमूनों को इकट्ठा करना, इन्हें संभालना और इसके बाद अपराध का पता लगाना मुश्किल काम है, क्योंकि ऐसी परिस्थितियों में घटनास्थल पर पाए जाने वाले मानव शरीर के ऊतक पूरी तरह से जली अवस्था में होते हैं, हड्डियां राख हो जाती हैं और एक ही व्यक्ति के शरीर की हड्डियां राख के रूप में कई टुकड़ों में बिखरी होती हैं।
सहायक जनसंपर्क अधिकारी डॉ. रजनीश सिंह ने बताया कि भवन के सभी तलों पर गंभीर आग लगी थी, जहां लोगों के शरीर करीब पूरी तरह जलकर राख हो चुके हैं। ऐसी स्थिति में विशेषज्ञों के लिए अपराध स्थल पर नमूनों को पहचानना और उन्हें इकट्ठा करना बेहद चुनौतीपूर्ण है। हालांकि, अपराध स्थल का विस्तृत निरीक्षण किया गया है और इकट्ठा किए गए नमूने जांच अधिकारी को सौंप दिए गए हैं।
फोरेंसिक जांच पूरी होते ही निगम करेगा कार्रवाई
फोरेंसिक जांच पूरी होते ही उत्तरी दिल्ली नगर निगम मुंडका अग्निकांड वाली बिल्डिंग के खिलाफ कार्रवाई करेगा। निगम जांच के बाद तय करेगा कि इस बिल्डिंग को गिराना है या सील करना है।
उत्तरी दिल्ली नगर निगम के नरेला जोन के उपायुक्त रंजीत सिंह ने बताया कि अभी यह बिल्डिंग दिल्ली पुलिस और फोरेंसिक जांच टीम के अधीन है। फोरेेंसिक टीम साक्ष्य जुटाने में जुटी है। जांच पूरी होने के बाद निगम अपनी जांच शुरू करेगा। यदि बिल्डिंग गिराने की हालत में होगी, तो इसे बिना देर किए धराशायी कर दिया जाएगा।
बिल्डिंग गिराए जाने की संभावना अधिक : दिल्ली पुलिस और फोरेंसिक जांच टीम के अनुसार, यह बिल्डिंग आग से तबाह हो गई है। ऐसे में इस बिल्डिंग का खड़ा रहना खतरे से खाली नहीं। भीषण आग लगने की स्थिति में बिल्डिंग का तापमान इतना ज्यादा हो गया था कि दीवारें आग की तरह लाल हो गई थीं। ऐसी स्थिति में बिल्डिंग में इस्तेमाल सरिया, सीमेंट और ईंट सबकुछ जलकर भस्म हो गए हैं। इसलिए माना जा रहा है कि बिल्डिंग गिराए जाने की संभावना अधिक है।