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खास खबर : उमर कम है लेकिन हुनर में दम है, लकड़ी पर इनकी बारीक नक्काशी देखते ही बनती है

Tue, 23 Feb 2021 02:22 AM IST
Vikas Kumar आदित्य पाण्डेय, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मो. अमीन फारुकी - फोटो : amar ujala
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जामिया के बगल जाकिर नगर के निवासी मो. अमीन फारुकी की उम्र कम है, लेकिन हुनर में दम है। ऐसा ना होता तो केवल 24 साल की उम्र में उन्हें इस साल दिल्ली सरकार की ओर से कला का स्टेट अवार्ड ना प्रदान किया जाता। जवाहर लाल नेहरू (जेएलएन) स्टेडियम में आयोजित हुनर हाट में उनकी कला का नमूना देखा जा सकता है।

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मूलरूप से सीकर राजस्थान के रहने वाले अमीन का परिवार वर्षों से दिल्ली में ही रहता है। इनके छोटे से परिवार में सभी कलाकार हैं। इनके पिता उस्ताद इरशाद हुसैन फारुकी को साल 2010 में महामहिम राष्ट्र्पति के हाथों राष्ट्रीय शिल्प गुरु का पुरस्कार मिल चुका है। साल 2019 में दुनिया को अलविदा कह गए पिता लकड़ी पर कैलीग्राफी (कैलीग्राफी इन वुड) करते थे, मां उनका हाथ बटाती थीं। फिलहाल अमीन ने भी लकड़ी पर कैलीग्राफी कर अपना करियर बनाने का फैसला किया है। पिछले दस साल से वह पिता के पद चिन्हों पर चल रहे हैं। उन्हें पिता की तरह देशभर में कला के क्षेत्र में उत्कृष्ठ काम कर नाम कमाना है।

अमीन ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है। लेकिन उन्होंने कला के क्षेत्र में ही अपना करियर बनाने का निर्णय लिया है। अभ्यास करते-करते अब उनकी कलम के साथ-साथ चोरसी (लकड़ी पर महीन काम करने का हथियार) पर भी बराबर पकड़ बन चुकी है। वह लकड़ी पर शानदार नक्काशी करते हैं। मौजूदा समय वह लकड़ी पर %खत-ए-दीवानी, खत-ए-सुल्स और खत-एक-कूफी फॉन्ट स्टाइल% में काम करते हैं। 
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परवीन फरुकी ने हमेशा सहयोग किया
पिता की मौजूदगी और गैरमौजूदगी दोनों वक्त में परवीन फारुकी ने अपने बेटे अमीन का साथ दिया है। परवीन पति के साथ देशभर में एग्जिविशन में जाया करती थीं। उनको भी लकड़ी पर कैलीग्राफी कला की अच्छी जानकारी है। अब वह अपनी बेटी के साथ मिलकर अमीन का हाथ बंटाती हैं। 

अवार्ड मिलने के बाद से बढ़ा जोश
अमीन को साल 2017 में दिल्ली सरकार ने स्टेट अवार्ड के लिये नामिनेट किया था। जिसके बाद से अमीन का जोश कई गुना बढ़ा है। उन्होंने हुनर हाट में डिस्प्ले के लिये लगाई अपने पिता की मास्टरपीस 'आयतल कुर्सी' को दिखाते हुए कहा, कि इसी काम के लिये पिता को शिल्प गुरू का खिताब मिला था। इसे वालिद साहब ने 5-6 महीने में तैयार किया था। अब वह पिता के जैसी ही मास्टरपीस बनाना चाहते हैं।

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