दिल्ली व पंजाब की सत्ता पर काबिज और राष्ट्रीय पार्टी का तमगा हासिल करने वाली आम आदमी पार्टी (आप) ने राष्ट्रीय फलक पर फैल जाने का रणनीतिक रोड मैप तैयार कर लिया है। लोकसभा चुनाव से पहले आप अपना प्रयोग नवंबर में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ व राजस्थान के विधानसभा चुनावों में करेगी। तीनों राज्यों में अब तक कांग्रेस व भाजपा में सीधा मुकाबला रहा है और कांग्रेस व भाजपा का विकल्प तलाश रहे मतदाताओं के लिए आप खुद को पेश करेगी।
आप रणनीतिकार बताते हैं कि तीनों राज्यों में अगर कांग्रेस कमजोर होती है तो कांग्रेस के साथ ही दूसरी क्षेत्रीय पार्टियां भी यह मानने का मजबूर होंगी कि आप के बगैर भाजपा को टक्कर नहीं दी जा सकती है। मजबूत विपक्ष के लिए आप जरूरत बन जाएगी। आप की लोकसभा की रणनीति भी बहुत हद तक तीनों विधानसभा चुनावों के प्रदर्शन से तय होगी। सियासी मजबूती मिलने पर आप अपने राष्ट्रीय संयोजक व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी लोकसभा चुनाव में उतार सकती है।
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि आंदोलन से जन्मी आप किसी विशेष विचारधारा से नहीं बंधी है। वहीं, महानगरीय शहर दिल्ली की सत्ता पर काबिज आप दूसरे क्षेत्रीय दलों से अलग है। तभी अरविंद केजरीवाल के साथ किसी जाति व क्षेत्र से बंधे होने की मजबूरी नहीं है। वहीं, भाजपा की तरह ही अरविंद केजरीवाल हर कीमत पर सत्ता हासिल करने की राजनीति की बुनियादी खूबी में भी फिट बैठते हैं। दूसरी तरफ क्षेत्रीय क्षत्रपों की मजबूत पैठ वाले राज्यों की जगह आप की दिलचस्पी उन राज्यों में ज्यादा है, जहां कांग्रेस व भाजपा के बीच मुकाबला सीधा है। यही वजह है कि उनकी नजर में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ व राजस्थान सरीखे राज्य हैं, जहां कांग्रेस का सियासी विकल्प बनने का संभावना है।
आप रणनीतिकारों की भी मानें तो अभी तक यह रणनीति उनके लिए घाटे का सौदा साबित नहीं हुई है। तभी दिल्ली व पंजाब में सत्ता हासिल कर और गोवा व गुजरात विधान सभा चुनाव के प्रदर्शन से गठन के दस साल के भीतर आप ने राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल कर लिया है। आगे की रणनीति भी इसी आधार पर तैयार है। एक आला पदाधिकारी ने बताया कि अभी पार्टी की नजर में नवंबर के तीन राज्यों के चुनाव हैं। इन राज्यों के सियासी प्रदर्शन से आप की लोक सभा चुनाव की रणनीति तय होगी। अगर अपेक्षा के अनुरूप रहा तो आप संयोजक को भी चुनाव में उतारा जा सकता है। इससे कार्यकर्ताओं में अच्छा संदेश जाएगा और संसदीय चुनाव में आप की पकड़ मजबूत होगी। इसके बाद पार्टी हरियाणा विधान सभा चुनाव में जोर लगाएगी।
रैलियों व रोड शो से होगी शुरुआत
आप रणनीतिकारों का दावा है कि अगले महीने आप अपने अभियान का शंखनाद कर देगी। शुरुआत रोड शो और महा रैलियों से होगी। हर महारैली व रोड शो में दिल्ली व पंजाब के मुख्यमंत्री शिरकत करेंगे। पहला फेज पूरा होने के बाद आप दूसरे चरण के लिए काम शुरू करेगी। तीनों राज्यों के चुनाव के बाद पार्टी पूरी तरह से संसदीय चुनाव में लग जाएगी।
समझौते के लिए कांग्रेस तैयार नहीं, आप के दरवाजे खुले
कांग्रेस भी रणनीतिक तौर पर आप से परहेज कर रही है। तभी केंद्र सरकार के दिल्ली की सेवाओं पर आए अध्यादेश के खिलाफ विपक्ष को लामबंद कर रहे अरविंद केजरीवाल का समर्थन अभी तक कांग्रेस ने नहीं किया है। इसके उलट दिल्ली व पंजाब के नेता आप के साथ जाने का विरोध भी कर रहे हैं। दूसरी तरफ आप रणनीतिकार मानते हैं कि वह कांग्रेस से समझौता कर सकती है। अभी उसकी प्राथमिकता में भाजपा को हराना है। बावजूद इसके आप रणनीतिकार दबी जुबान से यह भी कह रहे हैं कि कांग्रेस आसानी से आप के साथ नहीं आएगी। इसी वजह से अरविंद केजरीवाल ने अध्यादेश पर कांग्रेस के पास जाने की जगह पश्चिम बंगाल व महाराष्ट्र की तरफ रुख किया है।