इस बैठक में आम राय बनी कि अगर आरक्षण देना है तो सभी को दीजिये नहीं तो किसी को भी मत दीजिये। क्योंकि वर्तमान आरक्षण प्रणाली से सवर्ण समाज को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
दिल्ली स्थित महाराष्ट्र सदन में वर्तमान में प्रचलित आरक्षण पद्धति को बदलने को लेकर सवर्ण समाज से जुड़े कई संगठनों के पदाधिकारियों नें अहम बैठक की। यह बैठक देश में जारी आरक्षण व्यवस्था से सवर्ण समाज को हो रहे नुकसान पर केंद्रित था।
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इस बैठक में आम राय बनी कि अगर आरक्षण देना है तो सभी को दीजिये नहीं तो किसी को भी मत दीजिये। क्योंकि वर्तमान आरक्षण प्रणाली से सवर्ण समाज को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। आये दिन सवर्ण समाज से जुड़े लोगों को सरकारी सुबिधाओं में आरक्षण की वजह से असफलता का मुह देखना पड़ रहा है। समाज के लोगों का कहना था कि 10 साल के लिए शुरू किया गया आरक्षण वोट बैंक का शिकार हो गया और सवर्णों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस मामले पर सरकार सवर्णों के साथ सौतेला व्यवहार छोड़कर सबको समान व्यवहार से पेश आये नहीं तो हम लोग आने वाले समय में अन्य सवर्ण समाज के लोगों को जोड़ेंगे और एक देशव्यापी आन्दोलन का आगाज करेंगे।
घंटों चली इस बैठक में क्षत्रिय संगठनों के अलावा मराठा समाज के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया। आरक्षण की वर्तमान पद्धति को बदलने के लिए इस अहम बैठक में मराठा समाज का प्रतिनिधित्व, औरंगाबाद के कन्नड़ तहशील से पूर्व विधायक रहे हर्षवर्धन जाधव, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष व राष्ट्रीय महासचिव अनीता सिंह तंवर, अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेंद्र सिंह तंवर, डॉक्टर अशोक चौहान, ध्यान पाल सिंह और तरुण सिंह, भोपाल सिंह नेगी, ममता सिंह और ईशा झा आदि उपस्थित रहे।