एमसीडी वित्त वर्ष 2023-24 में 16023.55 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इसमें सबसे ज्यादा बजट सफाई पर व्यय होगा। एमसीडी अपने बजट का 27.87 फीसदी सफाई पर खर्च करेगी। प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर 20.82 फीसदी बजट खर्च करेगी।
इसी तरह शिक्षा पर 17.77 फीसदी, लोक निर्माण कार्य एवं पथ प्रकाश पर 11.36 फीसदी और जन स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सहायता पर 10.37 फीसदी बजट खर्च करेगी। बुधवार को निगम आयुक्त ज्ञानेश भारती की ओर से दिसंबर में बनाए गए प्रस्तावित बजट को ही मेयर ने सदन में पेश कर पास करा लिया। इसमें कोई बड़ा बदलाव नहीं है।
एमसीडी की सत्ता में आप के आ जाने से निगम की आय में बढ़ोतरी जरूर हुई है। दिल्ली सरकार ने अपने आगामी बजट वर्ष में एमसीडी को 8,241 करोड़ रुपये वित्तीय सहयोग देने की घोषणा की है। इसमें 850 करोड़ ऋण का प्रावधान है। निगम की योजनाओं, कार्यक्रमों, परियोजनाओं के लिए 2659 करोड़ रुपये, बेसिक टैक्स असाइनमेंट के रूप में 2492 करोड़, स्टांप, पंजीकरण शुल्क के रूप में 2240 करोड़ दिए हैं। इससे एमसीडी की आय पर असर पड़ेगा, जबकि आयुक्त के अनुमानित बजट में कुल आय 15523.95 करोड़ बताई गई थी।
केजरीवाल की दो गारंटी पूरी : दुर्गेश
बजट मीटिंग के बाद आप पार्टी के विधायक दुर्गेश पाठक ने सिविक सेंटर में प्रेस वार्ता को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि निगम में केजरीवाल की दो गारंटी पूरी हो गई हैं। एमसीडी में अब कर्मचारियों को समय से तनख्वाह मिलेगी और व्यापारियों को सीलिंग से राहत मिलेगी।
सदन में व्यापारियों को खुश करने वाले प्रस्ताव पास
बुधवार को सदन में पक्ष-विपक्ष की तरफ से कुल 15 निजी प्रस्ताव लाए गए थे, जिनमें से छह प्रस्ताव सदन में पास किए गए। रविंद्र भारद्वाज के प्रस्ताव को सदन में पास किया गया। प्रस्ताव के मुताबिक चांदनी चौक क्षेत्र में निगम कन्वर्जन व पार्किंग प्रभारों की मांग संबंधी नोटिस भेज रहा है, अब जब तक निगम इसपर प्रभावी व पारदर्शी नीति नहीं बना लेगा, तब तक दुकानदारों, व्यापारियों को नोटिस नहीं भेजा जाएगा।
प्रेम चौहान ने भी कुछ तरह का प्रस्ताव रखा था, जिसे सदन में मंजूरी दी गई। प्रवीण ने प्रस्ताव रखा कि सीलिंग खोलने से संबंधित मामलों में विचार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने स्वतंत्र न्यायिक समिति गठित की है, जिससे संपत्तियों को डी-सील किया जा सके। एमसीडी ऐसे मामलों में हस्तक्षेप करने के बजाय व्यापारियों की मदद करेगी। सदन में उनके प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई।
मुकेश गोयल ने भी सदन में प्रस्ताव रखा कि सामुदायिक विकास केंद्र से जुड़े कन्वर्जन प्रभारों की वसूली के संबंध में आयुक्त की ओर से किसी को भी नोटिस नहीं भेजा जाएगा। इसे सदन की मंजूरी दी गई। फिलहाल इन निजी प्रस्तावों को जमीन पर कैसे लागू कराना है, इसका फैसला निगम आयुक्त को ही लेना है। वहीं भाजपा के सारे प्रस्ताव रद्द कर दिए गए।