हुक्कों की गुड़गुड़ाहट, गुलजार चौपाल और हरियाणवी लहजे में बातचीत...दिल्ली के करीब 50 गांवों का माहौल इस वक्त यूं ही नजर आता है। चुनाव बेशक नगर निगम का है, लेकिन एकबारगी अहसास पंचायत चुनाव का हो जाता है।
गांवों की चौपाल पर सियासी बिसात निगम चुनाव की बिछी होती है। सिविक सेंटर पहुंचने वालों की किस्मत पर यहां चर्चा आम रहती है। इसकी वजह भी है। दिल्ली के करीब 50 गांवों में निगम चुनाव के लिए एक-एक गांव से दो से तीन उम्मीदवार हैं। इनके समर्थन में गांव के लोग उसी तरह बंटकर निर्णय लेते रहे हैं, जैसे कभी अपने गांव की पंचायत के सरपंच (प्रधान) के चुनाव में बंट जाते थे।
राजधानी में अंतिम बार वर्ष 1983 में पंचायत चुनाव हुए थे, लेकिन एमसीडी चुनाव में एक ही गांव से कई उम्मीदवारों के मैदान में आने के कारण पंचायती चुनाव की याद ताजा हो गई है। राजधानी के 50 से अधिक गांवों में पंच दो-तीन ग्रुप में बंट गए हैं। उन्होंने अपने-अपने उम्मीदवार को जिताने के लिए पूरी ताकत लगानी शुरू कर दी है। वे अपने उम्मीदवार के समर्थन में चौपालों में जुट रहे है और वहां हुक्के गुड़गुड़ाते हुए अधिक से अधिक ग्रामीणों को अपने साथ जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।
दूसरी ओर 50 गांवों के पंच आपस में बहस करने के साथ-साथ एक-दूसरे के उम्मीदवार को कमजोर और अपने उम्मीदवार को मजबूत करार देने में लगे हुए हैं। वे सुबह ही अपने उम्मीदवार के कार्यालय में पहुंंच जाते हैं और वहां से रणनीति तय करके इलाके में अपने प्रभाव वाले लोगों के यहां दस्तक देने के लिए कूच करते हैं।
इसके अलावा वे उम्मीदवार के साथ पदयात्रा भी करते हैं। हालांकि इन गांवों के कुछ ग्रामीण तनावपूर्ण माहौल से स्वयं को दूर रखे हुए हैं। वे न तो अपने पसंद वाले उम्मीदवार के कार्यालय में जाते हैं और न उसके लिए वोट मांगने के लिए घर से निकलते हैं। वे अपने पसंद की उम्मीदवार के बारे में भी बताने से बच रहे हैं।
गालिबपुर के दो नेता दूसरे वार्डों से लड़ रहे चुनाव
पश्चिम दिल्ली के गालिबपुर गांव के दो निवासियों को भी दो प्रमुख दलों से टिकट मिला हुआ है। वह अपने गांव वाले वार्ड की बजाय दो अन्य वार्डों से चुनाव लड़ रहे हैं। लिहाजा इस गांव के निवासी बंटने की बजाय एकजुट होकर अपने गांवों के दोनों उम्मीदवारों को जिताने में लगे हुए हैं। वह बारी-बारी से उनके वार्डों में जाकर ताकत लगा रहे हैं।
इन गांवों के निवासी हैं तीन से चार उम्मीदवार
- बुराड़ी, समयपुर बादली, बवाना, बिजवासन, कापसहेड़ा, महिपालपुर, तुगलकाबाद के तीन-तीन निवासी प्रमुख दलों के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं और वे एक-दूसरे को चुनावी दंगल में मात देने में देने में जुटे हैं
- नांगलोई व मुनिरका के चार-चार निवासी प्रमुख दलों के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं, इनमें तीन-तीन निवासी तो अपने गांव के वार्ड से एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि एक-एक निवासी दूसरे वार्ड से चुनाव लड़ रहे हैं
- रानीखेड़ा में कराला निवासी दो चचेरे भाइयों की पत्नी एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रही हैं