दादा की लाडली मानसी मौत के बाद भी जिंदा रहेगी, हालांकि उसका दिल किसी और के शरीर में धड़केगा। उसकी आंखों से दुनिया कोई और ही देखेगा। दुनिया से अलविदा लेने के बाद मानसी दो लोगों की जिंदगी संवार गई है।
दरअसल, मथुरा के कोसी में रहने वाली करीब आठ साल की मानसी दो नवंबर को अपने छत से खेलते-खेलते नीचे गिर गई थी। घटना के तुरंत बाद उसे एम्स ट्रामा सेंटर लाया गया। सिर में लगी गंभीर चोट के बाद 11 दिनों तक वह जिंदगी और मौत से संघर्ष करती रही। 12 नवंबर को मानसी ने दम तोड़ दिया। मौत के बाद मानसी के दादा महेश चंद ने अंगदान करने का सुझाव दिया इसके बाद पिता रमाकांत ने अंगदान की सहमति दी। अंगदान के इस फैसले का ग्राम प्रधान मुकेश ने भी समर्थन किया था।
परिवार से मिले समर्थन के बाद मानसी के लीवर और एक किडनी को आईएलबीएस अस्पताल में भर्ती 12 साल की बच्ची में ट्रांसप्लांट किया गया। वहीं दूसरी किडनी एम्स में भर्ती मरीज में ट्रांसप्लांट किया गया। जबकि मानसी की कॉर्निया (आंखें) और हार्ट वॉल्व को नेशनल आई बैंक व एम्स दिल्ली के हार्ट वॉल्व बैंक में सुरक्षित रखा गया है। इन्हें जल्द ही अन्य मरीजों में ट्रांसप्लांट किया जाएगा।
एम्स ट्रामा सेंटर में 48 घंटे में दूसरा अंगदान
एम्स ट्रामा सेंटर में 48 घंटों में दूसरा अंगदान हुआ। अंगदान करने वालों में माहिरा और मानसी शामिल हैं। दोनों बच्चों की मौत गिरने के बाद सिर में लगी गंभीर चोट से हुई है। एम्स के अंग रिट्रेवाल बैंकिंग ऑर्गेनाइजेशन (ओआरबीओ) की प्रमुख डॉ आरती विज ने कहा समाज के लिए यह एक अच्छा संदेश है कि अंगदान करने के लिए लोग आगे आ रहे हैं। बॉक्स
मुझे देखती रहेगी मानसी की आंखें
एम्स ट्रामा सेंटर में मानसी के शव को लेने पहुंचे पिता रमाकांत ने कहा कि वह दुनिया छोड़कर जरूर चली गई, लेकिन उसकी आंखें हमें देखती रहेगी। वह हमेशा इस दुनिया में रहेगी।