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लोकसभा : केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने पेश किया दिल्ली नगर निगम संशोधन विधेयक-2022, आरएसपी, कांग्रेस, बसपा कर रहे विरोध

Fri, 25 Mar 2022 12:55 PM IST
अनुराग सक्सेना एएनआई, नई दिल्ली

सार

दिल्ली के तीनों नगर निगमों का विलय करने के लिए दिल्ली नगर निगम अधिनियम-1957 में संशोधन करने संबंधी विधेयक शुक्रवार को लोकसभा में पेश किया गया। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को दिल्ली के तीनों नगर निगमों के विलय के विधेयक को मंजूरी दे दी थी।
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लोकसभा में बिल पेश करते केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने शुक्रवार सुबह लोकसभा में दिल्ली की तीनों नगर निगमों के एकीकरण के लिए दिल्ली नगर निगम (संशोधन) विधेयक-2022 पेश किया। हालांकि रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी), कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने इस विधेयक का विरोध किया।

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विधेयक पेश करते हुए राय ने कहा कि अनुक्षेद 239एए संसद को केंद्र शासित प्रदेश से संबंधित कोई भी कानून बनाने का अधिकार देता है।

आरएसपी नेता एनके प्रेमचंद्रन, कांग्रेस नेता गौरव गोगोई और मनीष तिवारी, बसपा सदस्य रीतेश पांडे ने विधेयक को पेश करने का विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि संसद को विधेयक में संशोधन करने का अधिकार नहीं है।

प्रेमचंद्रन ने कहा कि नगर निगम को तीन नगमों में विभाजित करने के विधेयक को दिल्ली विधानसभा में पारित किया गया था और नगर निगमों को विलय करना संसद के अधिकार क्षेत्र से बाहर है।गोगोई ने दावा किया कि तीनों नगर निगमों का संसद के माध्यम से विलय कर एक निगम बनाने का केंद्र का कदम संविधान के संघीय ढांचे पर हमला है।
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दिल्ली के तीनों नगर निगमों का विलय करने के लिए दिल्ली नगर निगम अधिनियम-1957 में संशोधन करने संबंधी दिल्ली नगर निगम (संशोधन) विधेयक-2022 शुक्रवार को लोकसभा में पेश किया गया। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को दिल्ली के तीनों नगर निगमों के विलय के विधेयक को मंजूरी दे दी थी। सूत्रों के अनुसार तीनों नगर निगमों का विलय होने के बाद अस्तित्व में आने वाली नगर निगम में 250 से अधिक वार्ड नहीं होंगे। इस तरह वार्डों का परिसीमन किया जाएगा।

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इसके अलावा नगर निगम के चुनाव नहीं होने तक उसकी कमान संभालने के लिए किसी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी या फिर सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी को प्रशासक नियुक्त किया जाएगा। तीनों नगर निगमों को कभी भी भंग किया जा सकता है।

वार्डों का किया जाएगा परिसीमन

वार्डों की संख्या जनगणना के आधार पर तय की जाएगी। विधेयक के प्रावधानों के अनुसार नगर निगम में वार्डों की कुल संख्या किसी भी स्थिति में 250 से अधिक नहीं होगी। वर्ष 2007 में एकीकृत नगर निगम में वार्डों की संख्या 134 से बढ़ाकर 272 की गई थी और वर्ष 2012 में नगर निगम का विभाजन के बाद अस्तित्व में आई उत्तरी, दक्षिणी और पूर्वी दिल्ली नगर निगम में भी 272 वार्ड हैं। उत्तरी और दक्षिणी दिल्ली नगर निगम में 104-104 वार्ड, जबकि पूर्वी दिल्ली नगर निगम में 64 वार्ड हैं।
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