इसके अलावा नगर निगम के चुनाव नहीं होने तक उसकी कमान संभालने के लिए किसी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी या फिर सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी को प्रशासक नियुक्त किया जाएगा। तीनों नगर निगमों को कभी भी भंग किया जा सकता है।
वार्डों का किया जाएगा परिसीमन
वार्डों की संख्या जनगणना के आधार पर तय की जाएगी। विधेयक के प्रावधानों के अनुसार नगर निगम में वार्डों की कुल संख्या किसी भी स्थिति में 250 से अधिक नहीं होगी। वर्ष 2007 में एकीकृत नगर निगम में वार्डों की संख्या 134 से बढ़ाकर 272 की गई थी और वर्ष 2012 में नगर निगम का विभाजन के बाद अस्तित्व में आई उत्तरी, दक्षिणी और पूर्वी दिल्ली नगर निगम में भी 272 वार्ड हैं। उत्तरी और दक्षिणी दिल्ली नगर निगम में 104-104 वार्ड, जबकि पूर्वी दिल्ली नगर निगम में 64 वार्ड हैं।