- एक करोड़ रुपये से अधिक लागत पर बना, 90 फीसदी भुगतान का भी दावा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल में मरीजों को लैब रिपोर्ट के लिए अभी भी मैन्युअल प्रक्रिया पर निर्भर रहना पड़ रहा है। करीब दो साल पहले एक करोड़ रुपये से अधिक की लागत से लगाया गया लेबोरेटरी इन्फॉर्मेशन सिस्टम (एलआईएस) पूरी तरह काम नहीं कर रहा है। इस सिस्टम का अस्पताल के मौजूदा हॉस्पिटल इन्फॉर्मेशन सिस्टम (एचआईएस) से इंटीग्रेशन अधूरा है।
एलआईएस का उद्देश्य लैब सेवाओं को एचआईएस से जोड़ना था। इससे बायोकेमिस्ट्री, पैथोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी जैसे विभागों की रिपोर्ट इलेक्ट्रॉनिक रूप से उपलब्ध होनी थी। मरीजों को रिपोर्ट की फिजिकल कॉपी लेने के लिए अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ते हैं। डॉक्टरों को भी जांच रिपोर्ट देखने के लिए मैन्युअल व्यवस्था पर निर्भर रहना पड़ता है।
सूत्रों के अनुसार, सिस्टम लगाने वाले वेंडर को करीब 90 फीसदी भुगतान किया जा चुका है। इसके बावजूद बायोकेमिस्ट्री से जुड़ा हिस्सा भी पूरी तरह इंटीग्रेट नहीं हो पाया है। यह मामला हाल ही में तब सामने आया जब अस्पताल के निदेशक ने लैब टेस्ट के कंप्यूटरीकरण की जानकारी मांगी। इंटीग्रेशन पूरा न होने से यह व्यवस्था अपने उद्देश्य को हासिल नहीं कर पाई है।
अधूरे इंटीग्रेशन से मरीजों को परेशानी
एलआईएस के चालू न होने से रिपोर्ट तैयार होने और मरीज तक पहुंचने की प्रक्रिया में डिजिटल लाभ नहीं मिल रहा है। मरीजों को रिपोर्ट की फिजिकल कॉपी के लिए अस्पताल जाना पड़ रहा है। डॉक्टरों को भी जांच रिपोर्ट देखने के लिए मैन्युअल व्यवस्था पर निर्भर रहना पड़ता है।