नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने परिजनों के डर से भागकर दिल्ली आए समलैंगिक युगल के मामले का निपटारा कर दिया। अदालत को बताया गया कि दोनों को सुरक्षित आवास प्रदान कर दिया गया है। पंजाब निवासी याची ने तर्क रखा था कि वे शादी करना चाहते हैं जिसका उनके पारिवारिक सदस्य विरोध कर रहे हैं और उनकी जान को खतरा है।
न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता के समक्ष मामले की सुनवाई के दौरान याची के अधिवक्ता ने बताया कि दोनों को दिल्ली सरकार की ओर से आवास प्रदान कर दिया गया है और वे सुरक्षित हैं। अदालत ने कहा अब याचिक पर आगे सुनवाई का कोई औचित्य नहीं है। ऐसे में वे याचिका का निपटारा करती हैं।
अदालत ने हाल ही में दिल्ली पुलिस से याचिकाकर्ता समलैंगिक युगल को सुरक्षा व सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। अदालत ने मयूर विहार फेज-एक के एसएचओ को निर्देश दिया था कि गैर सरकारी संगठन धनक आफ ह्यूमैनिटी के कार्यालय में रह रहे युगल को किंग्सवे कैंप स्थित सेवा कुटीर परिसर में सुरक्षित घर में शिफ्ट करे। साथ ही वहां पर पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराना भी सुनिश्चित करें।
अदालत ने सरकार को निर्देश दिया था कि समलैंगिक युगल को दो कमरे, एक शौचालय और रसोई वाला 60 वर्ग गज का सुरक्षित स्थान प्रदान करे। याचिका के अनुसार एक याचिकाकर्ता पंजाब के मोगा शहर का रहने वाला है, जबकि दूसरा पंजाब के लुधियाना स्थित मलौध का है। जिटोवाल काला स्थित एक धागा मिल में अगस्त 2020 में दोनों काम करते थे और धागा मिल के होस्टल में रहते थे।
काम करने के दौरान दोनों पहले अच्छे दोस्त बने। इस बीच दोनों फिर एक-दूसरे से प्यार करने लगे और साथ रहने का फैसला कर लिया। पारिवारिक सदस्यों के आपत्ति करने पर वे भाग कर दिल्ली आ गए।