नई दिल्ली। दिल्ली की सभी जिला अदालतों के बार संघों की समन्वय समिति ने उपराज्यपाल की ओर से 13 अगस्त को जारी एक अधिसूचना के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। इस अधिसूचना में दिल्ली के पुलिस थानों को पुलिस अधिकारियों के साक्ष्य दर्ज करने के लिए निर्दिष्ट स्थान बनाने की अनुमति दी गई थी जिसे विधिक समुदाय ने कानून के खिलाफ और जनता के हितों के विपरीत बताया है। ऐसे में समन्वय समिति ने इसको लेकर बृहस्पतिवार को एक बैठक की जिसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 22 और 23 अगस्त को दिल्ली के सभी जिला अदालतों में वकील पूर्ण कार्य-विरत रहेंगे।
इस दौरान कोई भी वकील प्रत्यक्ष या आभासी माध्यम से अदालतों में उपस्थित नहीं होगा। समिति ने सभी वकीलों से हड़ताल में सहयोग करने की अपील की है। साथ ही, चेतावनी दी है कि उल्लंघन करने वाले के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। समन्वय समिति के सचिव तरुण राणा ने बताया कि यह अधिसूचना न केवल कानून के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है बल्कि यह आम लोगों के अधिकारों का भी हनन करती है। उनकी मांग है कि इस अधिसूचना को तुरंत वापस लिया जाए। उन्होंने बताया कि समिति ने यह भी घोषणा की है कि 23 अगस्त को एक और बैठक आयोजित करेगी जिसमें स्थिति की समीक्षा की जाएगी और आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा। संवाद