विधानसभा के विशेष सत्र में बुधवार को जल बोर्ड व अन्य विभागों को वित्त विभाग से फंड नहीं मिलने पर विधायकों ने कड़ी नाराजगी जताई। विधायकों ने कहा कि फंड नहीं मिलने से जल बोर्ड की कई योजनाएं अधर में हैं। इससे कई इलाकों में गंदा पानी आ रहा है तो कई इलाकों तक पानी पहुंचाना मुश्किल है।
धायकों का समर्थन करते हुए जल मंत्री सौरभ भारद्वाज ने भी कहा कि जल बोर्ड को फंड नहीं मिल रहा है। विधायकों के साथ-साथ जल मंत्री की बात सुनने के बाद विधानसभा की कार्यवाही का संचालन कर रही उपाध्यक्ष राखी बिड़लान ने इस मामले को याचिका समिति के पास भेज दिया। समिति एक माह में विधानसभा को रिपोर्ट सौंपेगी।
जल बोर्ड की स्थिति पर आप विधायक दिनेश मोहनिया की ओर से रखे गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर विधायकों की ओर से रखी गई बातों का जवाब देते हुए जल मंत्री ने बताया कि पिछले साल कैपिटल मद के 1500 करोड़ रुपये को वेतन के तौर पर देने पर वित्त सचिव सवाल उठा रहे हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने यह राशि जल बोर्ड की योजनाओं को अमलीजामा पहनाने के लिए राशि में से काट ली।
ल बोर्ड ने अपनी योजनाओं के लिए दो हजार करोड़ रुपये मांगे थे, लेकिन वित्त विभाग ने 500 करोड़ रुपये ही दिए। वर्ष 2023-24 में 846 करोड़ की देनदारी खत्म करने के लिए राशि मांगने पर वित्त विभाग ने शर्त लगाई कि पहले के काम निपटाने के बाद दूसरी नई परियोजनाओं को लाएं। दिल्ली सरकार पैसा देना चाहती है, लेकिन वित्त सचिव फाइल पर आपत्ति लगा देते हैं।
जल बोर्ड की आय 1200 करोड़ रुपयेे और खर्च करीब 4500 करोड़ रुपये है। जल बोर्ड पानी मुहैया करवाने के साथ-साथ सीवर, पाइप लाइन बिछा रहा है। हिमाचल से अतिरिक्त पानी का समझौता किया, लेकिन हरियाणा ने अडंगा लगा दिया और पानी नहीं लाने दे रहा है। विधायक दिनेश मोहनिया ने कहा कि वित्त विभाग से विभिन्न योजनाओं के लिए जल बोर्ड को फंड जारी न करने से हालात खराब हो रहे हैं। कई इलाकों में टैंकर नहीं जा पा रहे हैं। विधायक प्रकाश जरवाल ने कहा कि मजदूरों को भुगतान के लिए पैसे नहीं है, गर्मियों में टैंकर के लिए डीजल तक के पैसे नहीं थे।
दिल्ली सरकार बनाती है बहाना : अजय महावर
भाजपा विधायक अजय महावर ने कहा कि दिल्ली सरकार काम नहीं करती, बल्कि बहाना बनाकर दूसरों पर आरोप लगाती है। वर्ष 1993 में भाजपा शासनकाल में जल बोर्ड 900 करोड़ रुपये लाभ में था, लेकिन अब घाटे में चल रहा है। उन्होंने आप विधायक की ओर से चीन की तारीफ करने की निंदा की।
नेता प्रतिपक्ष ने जल बोर्ड की दुर्दशा पर पूछे सवाल
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामबीर सिंह बिधूड़ी ने कहा कि 2014 में जो जल बोर्ड 500 करोड़ रुपये के फायदे में था, अब 72 हजार करोड़ रुपये के घाटे में कैसे चला गया। वर्ष 2016 से जल बोर्ड के खातों का सीएजी ऑडिट क्यों नहीं कराया गया। पानी के बिलों में करोड़ों रुपये का घोटाला कैसे हो गया।
जल बोर्ड अतिरिक्त पानी क्यों उपलब्ध नहीं करा पाया और यमुना की सफाई के लिए केंद्र सरकार ने दिए 8500 करोड़ रुपये का हिसाब जल बोर्ड क्यों नहीं दे रहा। उन्होंने जल बोर्ड की सीबीआई से जांच कराने की मांग की। उन्होंने पूछा कि हिमाचल से पानी क्यों नहीं ला पा रहे हैं।
विधायकों ने बाढ़, पेयजल संकट खराब बस सेवा के मुद्दे उठाए
विशेष सत्र में नियम 280 के तहत आम आदमी पार्टी और भाजपा विधायकों ने बाढ़, पेयजल संकट, बस सेवा बदतर होने आदि मुद्दे उठाए। इस दौरान भाजपा विधायकों ने दिल्ली सरकार पर निशाना साधा, जबकि आप विधायकों ने अधिकारियों को कठघरे में खड़ा किया। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का मामला उठाया।
उन्होंने कहा कि डीटीसी की बसें कम हो रही हैं और 3504 बसें उम्र पूरी होने के बावजूद चल रही हैं। सड़कों पर बसें खराब बसों से जाम लग जाता है। बसों में आग भी लग रही है। इसके बावजूद आठ साल में दिल्ली सरकार ने एक भी सीएनजी बस नहीं खरीदी, फिर भी 10 हजार करोड़ रुपये का डीटीसी को घाटा हो रहा है। ठेके पर काम करने वालों को पक्का करने का वादा भी पूरा नहीं किया गया। वहीं, भाजपा विधायक मोहन सिंह बिष्ट ने करावल नगर इलाके से गुजर रहे बांध के कारण क्षेत्र जलमग्न हो गए।
वेतन नहीं मिला
आप विधायक राजेंद्र पाल गौतम ने दिल्ली अनुसूचित जाति, जनजाति अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग आदि की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि डीएसआईडीसी में पांच महीने से कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है और न ही लोगों को लोन दिया जा रहा है। वहीं, आप विधायक बीएस जून ने कहा कि उनके क्षेत्र में गंदा पानी आ रहा है और फंड की कमी से टैंकर भी इलाके में नहीं पहुंच रहे हैं। कच्चा पानी पीने से लोग बीमार हो रहे हैं।
सत्र बुलाने के एलजी के एतराज पर सदन का इन्कार
उपराज्यपाल वीके सक्सेना के सत्र बुलाने पर एतराज को दिल्ली विधानसभा ने दरकिनार कर दिया है। सदन की शुरुआत में ही स्पष्ट कर दिया कि सेशन विधानसभा के कार्य संचालन नियमों से बुलाया गया है। यह विधानसभा अध्यक्ष का विशेषाधिकार है कि सत्र कब बुलाना है। इसके लिए कैबिनेट की सिफारिश जरूरी होती है।
वहीं, एनसीटी अधिनियम में बजट, मानसून और शीतकालीन सत्र जैसे तीन सत्रों का कोई प्रावधान भी नहीं है। उधर, विपक्ष ने उपराज्यपाल की आपत्तियों को सही करार दिया। बीते 11 अगस्त को उपराज्यपाल ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को एक पत्र लिखा और उसकी प्रति विधानसभा अध्यक्ष को भी भेजकर विधानसभा सत्र बुलाने पर आपत्ति जताइ्र थी। पत्र में एलजी ने लिखा था कि विधानसभा के चौथे सत्र का प्रस्तावित तीसरा भाग नहीं बुलाया जाना चाहिए था।
पहले विधानसभा का सत्रावसान करना चाहिए। इसके बाद कैबिनेट के प्रस्ताव पर विधानसभा का नए सत्र बुलाना चाहिए। यह जो सत्र बुलाया गया है, उसमें नियम व प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए था। सत्र की शुरुआत होते हुए अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रही विधानसभा उपाध्यक्ष राखी बिड़लान ने कहा कि विधानसभा का सत्रावसान करने की जगह इसे कई खंडों में आयोजित किया जाता है।
विधानसभा पूरी तरह से स्थापित नियमों के तहत चल रही है। सत्र का समय निर्धारित करने का अधिकार विधानसभा के पास है। एनसीटी अधिनियम विधानसभा के कामकाज की रूपरेखा तैयार करता है और उसके तहत ही कार्य किया जाता है। दूसरी तरफ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने उपराज्यपाल की ओर से लिखे गए पत्र को सही ठहराया।
उन्होंने कहा कि दिल्ली की मौजूदा सरकार अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर के मसलों पर सदन में परिचर्चा कराना चाहती है। यह नियमों के खिलाफ है। उन्होंने दिल्ली से जुड़े मसलों पर चर्चा कराने पर जोर दिया। वहीं, उन्होंने सदन में प्रश्नकाल नहीं होने पर भी आपत्ति जताई, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने नेता प्रतिपक्ष की आपत्तियों को खारिज कर दिया।