दिल्ली नगर निगम का चुनाव टलने पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली राज्य निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए घातक बताया है। सीएम का आरोप है कि तीनों एमसीडी को एक करना तो सिर्फ बहाना है, असली मकसद चुनाव टालना है। वजह यह कि आप की लहर को देखते हुए भाजपा डर गई है। केंद्र सरकार और आयोग से चुनाव कराने की अपील करते हुए केजरीवाल ने कहा कि इस तरह के कदमों से सांविधानिक संस्थाओं की गरिमा तार-तार हो रही है।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि 75 साल के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ होगा कि केंद्र सरकार ने किसी राज्य के चुनाव आयोग को चिट्ठी लिख कर चुनाव टालने के लिए कहा है। हालांकि, चुनाव आयोग की तैयारी पूरी थी। मीडिया के सामने आयोग को सिर्फ तारीख घोषित करना था। लेकिन एक घंटा पहले केंद्र सरकार ने चुनाव आयोग को चिट्ठी लिखी कि हम दिल्ली के तीनों नगर निगमों को एक नगर निगम बनाने जा रहे हैं। इसलिए आप यह चुनाव टाल दीजिए। जिसके बाद शाम पांच बजे दिल्ली चुनाव आयोग ने केंद्र सरकार के कहे मुताबिक चुनाव को टाल दिया।
केजरीवाल ने कहा कि लोग सवाल कर रहे हैं कि सात-आठ साल से केंद्र में भाजपा की सरकार है। अगर इनको तीनों एमसीडी को एक करना था, तो पिछले सात साल में इन्होंने क्यों नहीं किया? चुनाव की तारीखों के एलान के एक घंटा पहले इनको अचानक याद आया कि तीनों एमसीडी को एक करना है, इसलिए चुनाव को टाल दिया जाए। असली वजह भाजपा को हार का डर है। सीएम के मुताबिक, लोग यह भी कह रहे हैं कि चुनाव का एकीकरण से क्या लेना-देना है? तीनों नगर निगम में 272 वार्ड हैं। चुनाव हो जाने दीजिए। अगर तीनों को एक भी कर देंगे, तो वो एक जगह बैठने लग जाएंगे। अभी चुनाव टालने की क्या जरूरत है? चुनाव कराओ। नए पार्षद आएंगे और जब तक तीनों नगर हैं, तब तक वे तीनों में बैठ जाएंगे और जब एक नगर निगम हो जाएगा, तो वे एक साथ आकर बैठ जाएंगे। इसलिए चुनाव टालने की तो कोई जरूरत ही नहीं थी।
दिल्ली प्रदेश भाजपा ने तीनों नगर निगमों के चुनाव टालने के मामले में राज्य निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाने पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हमेशा अराजक भाषा एवं भ्रामक बातें करते हैं।
आदेश गुप्ता ने केजरीवाल की ओर से केंद्र सरकार पर चुनाव आयुक्त को ईडी आदि का डर दिखाने के लगाए गए आरोप पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शायद मुख्यमंत्री अपने अधिकारियों को दबाव में डालकर सरकारी काम कराते हैं। मुख्यमंत्री ने सात साल में राजनीतिक द्वेष के कारण नगर निगम को प्रशासनिक एवं आर्थिक रुप से बर्बाद करने का कार्य किया है।
उन्होंने कहा कि नगर निगम चुनाव कोई रद्द नहीं कर रहा है, बल्कि जनता की भलाई के लिए निगमों के एकीकरण कर उनकी कार्य प्रणाली सुचारु करने पर विचार हो रहा है, जिसमें कुछ समय लग सकता है। उन्होंने कहा कि नगर निगम का पुनर्गठन होने पर न केवल क्षेत्र का परिसीमन होगा, बल्कि महापौर, आयुक्त एवं अन्य पदाधिकारियों की नियुक्ति व्यवस्था के नियम बदलेंगे। दूसरी ओर दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने आरोप लगाया है कि नगर निगमों की वर्तमान स्थिति के लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जिम्मेदार है। उन्होंने 15 हजार करोड़ रुपये का बकाया फंड जारी न करके नगर निगमों को पंगु बना दिया।