जेएनयू में हम कोई बंदिशें नहीं लगाते हैं, बावजूद इसके यह सब हुआ। हम खुद भी हैरान हैं। 7 बजे तक सब ठीक था और जहां तक खाने का सवाल है, मेस छात्र चलाते हैं। विश्वविद्यालय मेस नहीं चलाती है। कुल 16 छात्रावास में कुछ नहीं हुआ। वहां नॉन वेज भी सर्व किया गया। एक ही हॉस्टल में क्यों समस्या हुई, पूजा खत्म हो गई थी। इफ्तार पार्टी भी चल रही थी और यह तो एक सप्ताह से चल रही है। तब रामनवमी के लिए आपत्ति क्यों, पूरी घटना की प्रॉक्टोरियल जांच के आदेश दे दिए गए हैं, जो भी दोषी होंगे, सख्त से सख्त सजा मिलेगी। जेएनयू विवाद पर विश्वविद्यालय की पूर्व छात्रा और पहली महिला कुलपति प्रो. शांतिश्री धुलीपुड़ी पंडित ने इसके साथ ही संदेह भी जताया कि यह विवाद सुनियोजित था। अमर उजाला संवाददाता सीमा शर्मा के साथ विस्तृत बातचीत के अंश...
कावेरी हॉस्टल में हिंसा की घटना पर आपका क्या कहना है?
कावेरी हॉस्टल में रामनवमी के दिन हिंसा की वारदात बेहद ही दुर्भाग्यपूर्ण है। कावेरी हॉस्टल में रामनवमी के दिन हवन और इफ्तार पार्टी दोनों चल रही थीं। कैंपस के 17 हॉस्टल में से 16 में नॉन-वेज बनता है, लेकिन रामनवमी की पूजा के दौरान ही हिंसा होती है। 7 बजे तक सब कुछ सामान्य था। पूजा समाप्त हो रही थी और इफ्तार पार्टी चल रही थी। इसी बीच अचानक कुछ छात्रों ने दिक्कत शुरू कर दी। घटना देर शाम की है पर ट्विटर पर पहले ही घटना की जानकारी अपलोड थी। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह सब कुछ सुनियोजित था, इसलिए इस घटना की प्रॉक्टोरियल जांच की जाएगी, ताकि सब कुछ सच सामने आ सके।
छात्र फूड फासिज्म का आरोप लगा रहे हैँ?
विश्वविद्यालय में सबको अपनी मर्जी से कोई भी खाना खाने और कपड़े पहनने की आजादी है। जेएनयू एक आजाद कैंपस है, यहां किसी पर भी कोई बंदिशें नहीं लगाते हैं। 7 बजे बताया गया कि छात्र मेस चलाती है, उसमें विश्वविद्यालय प्रशासन का कोई दखल नहीं होता है। जेएनयू के छात्रावासों में मेस का मेन्यू छात्र खुद तय करते हैं। कावेरी हॉस्टल की जीबीएम में छात्रों ने तय किया कि हिंदू धर्म के छात्रों की भावनाओं को देखते हुए नॉन-वेज पूजा समाप्त होने के बाद बनाएंगे। मतलब छात्रों ने यह फैसला आपसी सहमति से लिया था कि पूजा समाप्त होने के बाद मेस में नॉन-वेज पकाया जाएगा। अभी तक मेस सेक्रेटरी ने कोई रिपोर्ट नहीं दी है। सिर्फ वार्डन ने अपनी रिपोर्ट दी है। ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन कैसे बता सकता है। उनके विश्वविद्यालय में सभी धार्मिक शैलियों और भोजन विधियों के लिए बराबर सम्मान है। न निरामिष निषेध है और न ही सामिष भोजन। ऐसे किसी विषय पर वह राजनीति नहीं होने देंगी।
आखिर जेएनयू में हमेशा विवाद से नाता क्यों?
जेएनयू एक राष्ट्रवादी है, यहां 95 फीसदी छात्र और शिक्षक राष्ट्रवादी हैं। यह भारत समेत दुनिया का सर्वश्रेष्ठ उच्च शिक्षण संस्थान व रिसर्च सेंटर है, यहां बौद्धिक लोग पढ़ने आते हैं। एक छात्र बड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद आता है। विश्वविद्यालय के 95 फीसदी छात्र देश की सेवा में लगे हैं, लेकिन मीडिया में सिर्फ उन पांच फीसदी छात्रों को प्रमुखता मिलती है, जोकि पढ़ाई के इतर राजनीति और दूसरे विषयों में रुचि लेते हैं।
आखिर बार-बार दिक्कत क्यों आ रही है?
जेएनयू की दो बड़ी दिक्कत हैं। यहां लोकतंत्र और हर बात की आजादी है। छात्र यहां बड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद दाखिला लेता है। मैं साफ करती हूं कि जेएनयू को किसी कीमत पर राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने दूंगी। पांच साल पढ़ाई के लिए दाखिला मिला है। फ्री में पढ़ाई का अच्छा मौका मिला है, पढ़ाई करें और बाहर जाकर अच्छा भविष्य बनाएं। यदि राजनीति ही करनी है तो फिर पढ़ाई छोड़कर चुनाव लड़ें। कैंपस में पढ़ाई के दौरान किसी प्रकार की ऐसी गंदी राजनीति नहीं करने दूंगी।
आप पर एबीवीपी का साथ देने का आरोप लग रहा है?
मैं हिंदू या हिंदी नहीं, दक्षिण भारत के ओबीसी वर्ग से हूं। मैं तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश से हूं, जबकि मेरे पति महाराष्ट्र से हैं। मैं हिंदी सहित छह भाषाएं बोलती हूं। इतनी अलग-अलग पृष्ठभूमि की वजह से मेरे मन में सभी भाषाओं और धर्मों के प्रति पूरा सम्मान है। मैं हिंदू-हिंदी के झूठे नैरिटिव का हिस्सा नहीं हूं। मैंने तीन-तीन वर्जनाएं तोड़ी हैं। मैं इस विश्वविद्यालय की पहली महिला कुलपति हूं, पिछड़ी जाति से हूं और गैर-हिंदी भाषी हूं। संभवत यह उन लोगों को चुभता होगा जो महिला सशक्तीकरण की बात तो करते हैं, लेकिन करते नहीं हैं। जेएनयू में मुसलमान होली खेलते हैं और हिंदू छात्र ईद मनाते हैं। यह आज का नहीं, वर्षों पुराना चलन है, जब मैं खुद ही इसी विश्वविद्यालय की छात्रा थी। मैं आज जो भी हूं, इसी विश्वविद्यालय की बदौलत हूं इसलिए जेएनयू से मेरा गहरा नाता है। मेरा अपना विश्वविद्यालय और अपने छात्र हैं। मैं चाहती हूं कि मेरे जूनियर (पूर्व छात्रा के नाते) भविष्य में देश-दुनिया में अपने कामयाबी का परचम बुलंद करें। देश और जेएनयू का नाम रोशन करें।