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हाईकोर्ट : शिक्षकों का वेतन और बकाया न देने पर दिल्ली सरकार की खिंचाई, पूछा- देश का मुस्तकबिल गढ़ने वालों से ऐसा क्यों

Thu, 14 Apr 2022 05:43 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

हाईकोर्ट ने कहा कि पैसे की कमी कोई जवाब नहीं, यह अदालत के आदेश की अवहेलना है। अदालत ने मौखिक टिप्पणी में शिक्षा निदेशालय व दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील से कहा कि शिक्षकों के साथ इस तरह का व्यवहार कैसे किया जा सकता है? वे देश के भविष्य को आकार देते हैं। 
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दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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शिक्षकों को वेतन और बकाया देने में नाकाम रहने पर हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि ऐसे मामलों में पैसे की कमी कोई जवाब नहीं है। कोर्ट ने सवाल उठाया, देश का मुस्तकबिल गढ़ने वालों के साथ ऐसा कैसे कर सकते हैं?

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जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद शिक्षकों की ओर से दायर अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे थे। इनमें शिक्षकों ने छठे और सातवें वेतन आयोग के अनुसार वेतन का भुगतान न करने की शिकायत की है। अदालत ने मौखिक टिप्पणी में शिक्षा निदेशालय व दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील से कहा कि शिक्षकों के साथ इस तरह का व्यवहार कैसे किया जा सकता है? वे देश के भविष्य को आकार देते हैं। आपका आचरण शिक्षकों को वेतन देने के अदालत के आदेश की पूरी तरह अवहेलना है। उन्हें मुकदमा दायर करने के लिए मजबूर किया जाता है और फिर उन्हें सुप्रीम कोर्ट में घसीटा जाता है।

शिक्षा निदेशालय से सूची की तलब
अदालत ने मामलों की अंतिम सुनवाई के लिए सोमवार का दिन तय किया है। पीठ ने दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय को उन सभी शिक्षकों की सूची पेश करने के लिए कहा है, जिनका बकाया है। हाल ही में न्यायमूर्ति वी कामेश्वर राव ने कहा था कि एक गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूल के कर्मचारी सरकारी स्कूलों के कर्मचारियों को दिए जाने वाले लाभों के बराबर हकदार हैं। अदालत ने उनकी याचिकाओं को स्वीकार कर लिया, जिसमें गलत तरीके से काटे गए वेतन के भुगतान के लिए स्कूल को निर्देश देने की मांग की गई थी।
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मुकदमे के लिए किया जाता है विवश
आपका आचरण शिक्षकों को वेतन देने में कोर्ट की पूरी तरह से अवहेलना है। उन्हें मुकदमा दायर करने को विवश किया जाता है। फिर उन्हें सुप्रीम कोर्ट में घसीटा जाता है। फिर अवमानना होती है और यह चलता रहता है। -जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद

लागू कर रहे नहीं कहिए कि हमने लागू कर दिया
पीठ ने कहा कि अदालत यह बयान नहीं चाहती है कि हम लागू कर रहे हैं, बल्कि यह चाहती है कि हमने लागू किया है।याचिकाकर्ताओं ने दलील दी है कि उनके वेतन से जून 2020 और उसके बाद से अब तक की गलत तरीके से कटौती की गई राशि का भुगतान किया जाए।

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