याचिका में कहा गया है कि अपील को पहले ही इस अदालत के समक्ष चार बार सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा चुका है और यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता है कि सुनवाई की अगली तारीख तीन दिसंबर को भी इसे अंतिम रूप से सुना और निपटाया जा सकता है। याची ने कहा कि वीसी का कुल कार्यकाल पांच साल का है और वह 11 अप्रैल, 2019 से पिछले ढाई साल से अधिक समय से इस पद पर हैं, और इस पद के लिए उनका आधा कार्यकाल पहले ही समाप्त हो चुका है।
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इससे पहले याचिका पर केंद्र, केंद्रीय सतर्कता आयोग, जामिया, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और अख्तर को नोटिस जारी किया था। याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि अख्तर की नियुक्ति में समाप्त होने वाली पूरी प्रक्रिया सत्ता का दुरुपयोग और खुले तौर पर उल्लंघन व जामिया अधिनियम के वैधानिक प्रावधानों का पूर्ण गैर-अनुपालन है।
याची ने कहा कि सिंगल जज तथ्यों को समझने में असफल रहे है। सिंगल जज ने कहा था कि याचिकाकर्ता यह दिखाने में सक्षम नहीं है कि अख्तर को विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में नियुक्त करते समय यूजीसी विनियम या जामिया अधिनियम के किसी भी स्पष्ट प्रावधान का उल्लंघन किया गया है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि अख्तर की नियुक्ति इस कारण से अमान्य है कि सर्च समिति का गठन अवैध रूप से किया गया था और उसे शुरू में सीवीसी की मंजूरी से वंचित कर दिया गया था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि एमएचआरडी के हस्तक्षेप के बाद मंजूरी से इनकार को रद्द कर दिया गया था।