महिलाओं के लिए आज भले ही करियर के तमाम अवसर दिखाई देते हैं, लेकिन उनके सामने जो अदृश्य बाधाएं खड़ी हैं उनकी ओर किसी का ध्यान नहीं जाता। इन्हीं बाधाओं को कॉर्पोरेट दुनिया में ‘ग्लास सीलिंग’ कहा जाता है। एक महिला इन बाधाओं को पार कर कैसे ऊंचा मुकाम हासिल कर सकती है, इसके सूत्र सुझाए हैं प्रसिद्ध करियर और शिक्षा सलाहकार परवीन मल्होत्रा ने। वह अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में अमर उजाला के वेबिनार में बतौर मुख्य वक्ता शिरकत कर रही थीं।
देश की महिलाओं को चुनौतियों से निपटने के तरीके सुझाने और उनके जीवन में उजाले की अलख जगाने के उद्देश्य से इस वेबिनार का आयोजन किया गया गया। इसमें भाग लेने वाली महिलाओं को परवीन मल्होत्रा ने उदाहरणों के साथ समझाया कि उनके सामने असल चुनौती क्या है? भारतीय समाज में, जहां एक लड़की के लिए नौकरी कर अपने पैरों पर खड़े रहना एक सपने से कम नहीं, वहां लड़कियों और महिलाओं के पैरों में ऐसी ही बहुत सारी न दिखने वाली बेड़ियां भी हैं, जिनसे महिलाएं जूझ रही हैं। घरों में रसोई और बच्चे तक ही महिलाओं को सीमित रखा जाता है, लेकिन जैसे ही किसी आर्थिक निर्णय की बात आती है तो महिलाओं को पीछे छोड़ दिया
जाता है।
उनके मुताबिक मध्य दर्जे के कामकाज में महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए आजकल हर कोई मददगार नजर आता है लेकिन जब कोई महिला सीईओ जैसे ऊंचे ओहदे पर पहुंचने की कोशिश करती है, तब उसके सामने बाधाएं खड़ी कर दी जाती हैं। कॉर्पोरेट और सरकार से लेकर पंचायत तक में यही स्थिति देखने को मिलती है। ऐसी बाधाओं को पार करने वाली लड़कियां ही सशक्त कहलाती हैं और अपना आसमान खुद बना लेती हैं।
परवीन मल्होत्रा खुद भी उन असंख्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं जो अपने दम पर मंजिल हासिल करना और समाज में अपनी अलग पहचान बनाना चाहती हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि लड़कियों की शिक्षा, उनकी नौकरी और आगे चलकर समाज और व्यवस्था के नियमों में भागीदार नहीं बन पाने के पीछे पुरुष प्रधान समाज है। इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मंगलवार को मनाया जा रहा है जिसका ध्येय वाक्य भी ‘टिकाऊ कल के लिए आज लैंगिक समानता’ रखी गई है।